यूपी में अगले साल मार्च-अप्रैल में विधानसभा चुनाव है। इस लिहाज से माना जा रहा था कि केंद्रीय बजट में बिहार की तरह यूपी को भी कई सौगातें मिलेंगी। हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पिटारे से 1500 किमी के 2 हाई स्पीड रेल कॉरिडोर और शिप मरम्मत सेंटर के अलावा घोषित तौर पर कुछ खास नहीं मिला।
पहला कॉरिडोर- दिल्ली से वाराणसी के बीच होगा। दूसरा- वाराणसी से सिलीगुड़ी (पश्चिमी बंगाल) के बीच बनेगा। बजट में काशी पर खास फोकस किया गया है। जहां, काशी से दो कॉरिडोर शुरू होंगे। वहीं, पोर्ट भी बनाया जाएगा।
यूपी ने आबादी के आधार पर केंद्रीय कर और शुल्कों में बढ़ोत्तरी की मांग की थी, लेकिन पिछली बार की तुलना में 0.32% कम राशि मिली। तो क्या यूपी को कम तवज्जो मिली है? आखिर बजट में यूपी की उम्मीदों को पूरा क्यों नहीं किया गया? पढ़िए दैनिक भास्कर एनालिसिस…
2025 के केंद्रीय बजट में बिहार को दोनों हाथों से जमकर पैसे लुटाए गए थे। तब ये कहा गया था कि बिहार में साल के आखिरी में चुनाव होने हैं। ऐसी ही उम्मीद इस बार यूपी को लेकर की जा रही थी।
पिछली बार बिहार में मखाना बोर्ड बनाने से लेकर कोशी कैनाल परियोजना काे मंजूरी दी गई थी। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लंबी अवधि (50 साल) के लिए लगभग 15,000 करोड़ रुपए का ब्याज-रहित कर्ज भी मिला था।
केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में लगभग ₹1.43 लाख करोड़, अनुदान के रूप में 54,575 करोड़ मिले थे। यह राशि राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों की लगभग 74% थी।

