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Reading: संघर्ष से शिखर तक: संभल की अनुपमा ने रची नई इबारत, उद्यमी बन खड़ा किया ₹25 लाख का साम्राज्य
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अमर केसरी हिंदी दैनिक न्यूज़ > राज्य > उत्तर प्रदेश > संघर्ष से शिखर तक: संभल की अनुपमा ने रची नई इबारत, उद्यमी बन खड़ा किया ₹25 लाख का साम्राज्य
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संघर्ष से शिखर तक: संभल की अनुपमा ने रची नई इबारत, उद्यमी बन खड़ा किया ₹25 लाख का साम्राज्य

Amarkesadmin
Last updated: January 21, 2026 12:49 pm
Amarkesadmin
8 months ago
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– गोबर से बदला भाग्य, 500 महिलाओं की ‘मसीहा’ बनीं अनुपमा
– संभल की ‘लखपति दीदी’ गणतंत्र दिवस पर साझा करेंगी कामयाबी का मंत्र
– ₹1 लाख के कर्ज से शुरू हुआ सफर अब दिल्ली के राष्ट्रीय मंच तक पहुँचा

संभल/चंदौसी, 18 जनवरी। सफलता कभी भी चांदी की तश्तरी में सजकर नहीं आती, उसे अपने पसीने और फौलादी इरादों से छीनना पड़ता है। संभल जिले के बनियाखेड़ा गांव की 48 वर्षीय अनुपमा सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय था जब वह घर की तंगहाली दूर करने के लिए प्राइमरी स्कूल में शिक्षक की नौकरी करती थीं, लेकिन आज वह एक सफल उद्यमी हैं जिनका सालाना टर्नओवर ₹25 लाख तक पहुंच गया है।

आगामी 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को जब अनुपमा दिल्ली के राष्ट्रीय मंच पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ खड़ी होंगी, तो वह सिर्फ उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही होंगी, बल्कि उन करोड़ों महिलाओं की आवाज़ होंगी जो विपरीत परिस्थितियों से लड़कर आगे बढ़ना चाहती हैं।

अपनों का विरोध और तानों की आग में कुंदन बनीं अनुपमा

अनुपमा का यह सफर फूलों की सेज नहीं था। जब एक साधारण गृहिणी ने घर की दहलीज लांघकर ‘बिजनेस’ की दुनिया में कदम रखा, तो गांव के कुछ असामाजिक तत्वों को यह रास नहीं आया। उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, डराया गया और उनके काम में अड़ंगे डालने की हर मुमकिन कोशिश की गई। लेकिन अनुपमा ने हार मानने के बजाय इन चुनौतियों को ही अपनी ताकत बना लिया। जब विरोध बढ़ा, तो उनकी सत्यनिष्ठा और लगन को देखकर जिला प्रशासन और पुलिस उनके लिए ‘कवच’ बनकर खड़े हो गए। जिलाधिकारी डॉ राजेन्द्र पैंसिया द्वारा स्वयं आगे खड़े होकर उनके उत्पादों को आगे बढवाया तथा धीरे धीरे इनके उत्पादों में जनता की रुचि बढने लगी तथा उनके उत्पादों की बिक्री में बढोत्तरी होने लगी।

₹1 लाख के कर्ज से 500 महिलाओं के रोजगार तक का सफर

बदलाव की शुरुआत साल 2020 में हुई, जब अनुपमा ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की एक चौपाल देखी। योगी सरकार की योजनाओं से प्रेरित होकर वो ‘जानकी स्वयं सहायता समूह’ का हिस्सा बनी और ₹1 लाख का ऋण लेकर एक छोटा ब्यूटी पार्लर खोला। उनकी ईमानदारी और मेहनत ऐसी थी कि मात्र 10 महीने में उन्होंने पूरा कर्ज चुका दिया।

मिट्टी से सोना बनाने का हुनर: ‘गोमय उत्पादों’ की धूम

अनुपमा की आंखों में कुछ बड़ा करने का सपना था। जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में उन्होंने नागपुर और फिरोजाबाद में विशेष प्रशिक्षण लिया और गोबर (गोमय) से ऐसी कलाकृतियां बनानी शुरू कीं कि लोग देखते रह गए। आज उनके द्वारा बनाए गए गोबर के मोबाइल स्टैंड, मूर्तियां और थालियां दिल्ली और मुरादाबाद के बाजारों की शान बढ़ा रहे हैं। दिवाली और होली जैसे त्योहारों पर वह 70 से ज्यादा महिलाओं को काम देती हैं। यही नहीं, अब वह मोटे अनाज (मिलेट्स) के लड्डू, बिस्किट और रसगुल्ले बनाकर स्वास्थ्य और स्वरोजगार को एक साथ जोड़ रही हैं।

प्रशासन का साथ: अब कचहरी में महकेंगे अनुपमा के रेस्टोरेंट

अनुपमा की लगन का ही परिणाम है कि वर्ष 2026 में जिलाधिकारी ने उन्हें एक नई पहचान दी है। चंदौसी कचहरी के पास उन्हें 5 रेस्टोरेंट खोलने की अनुमति और जगह मिली है। इस नए उपक्रम से गांव की 15 और महिलाओं को स्थायी रोजगार मिलेगा, जिससे उनके घरों में भी खुशहाली आएगी।

18 राज्यों की ‘लखपति दीदियों’ को पीछे छोड़ बनीं मिसाल

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने देश भर से केवल 14 ‘लखपति दीदियों’ का चयन किया है। अनुपमा ने अपनी मेहनत से 18 राज्यों की महिलाओं को पीछे छोड़ते हुए इस सूची में अपनी जगह बनाई। वह क्लस्टर अध्यक्ष और बैंक सखी के रूप में अब तक 59 समूहों को लोन दिलाकर उन्हें पशुपालन से जोड़ चुकी हैं।

भविष्य का संकल्प: सैनिटरी पैड और अचार-पापड़ उद्योग

अनुपमा यहीं रुकने वाली नहीं हैं। उनका अगला लक्ष्य गांव में ही सैनिटरी पैड यूनिट लगाना और अचार-पापड़ के बड़े स्तर पर उत्पादन के जरिए जिले की हर गरीब महिला को ‘लखपति दीदी’ बनाना है। उन्होंने अब तक 59 स्वयं सहायता समूहों को बैंक लोन दिलवाकर भैंस और बकरी पालन समेत अन्य रोजगार से जोड़ा है, जबकि 42 अन्य समूहों को रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।

योगी सरकार की योजनाओं का मिला ‘कवच’

अनुपमा की सफलता में प्रदेश सरकार की नीतियों का बड़ा हाथ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने स्टार्टअप फंड को 15,000 से बढ़ाकर ₹1.5 लाख कर दिया है, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। इस योजना के तहत उन्हें ट्रेड शो (नोएडा और मुरादाबाद) में अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का मौका मिला, जिससे उनका सामान देश के कोने-कोने तक पहुंच रहा है। समूह के माध्यम से उन्होंने अब तक 1.5 लाख, 3 लाख और 6 लाख रुपये के सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) कराए हैं। इसके साथ ही एक जनपद एक उत्पाद योजना के तहत नोएडा और मुरादाबाद में आयोजित ट्रेड शो से जुड़ाव ने उनके उत्पादों को नया बाजार दिया है। अब ये उत्पाद सिर्फ जिले या प्रदेश तक सीमित नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग कोनों तक पहुंच रहे हैं। उनके कार्यों को देखते हुए अनुपमा को क्लस्टर अध्यक्ष और बैंक सखी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

इंसान जब अपनी विपरीत परिस्थितियों से थक जाता है, तभी वह अपने परिवार के लिए बड़ा जोखिम लेने का साहस जुटाता है। बस एक कदम आगे बढ़ाने की ज़रूरत है, सरकार और प्रशासन आपका हाथ थामने के लिए तैयार खड़ा है। — अनुपमा सिंह, सफल उद्यमी (लखपति दीदी)

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