बांदा जिले के अतर्रा क्षेत्र में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। अतर्रा के एसडीएम राहुल द्विवेदी पर एक ट्रक छोड़ने के बदले ऑनलाइन 42 हजार रुपये वसूलने का आरोप लगा है। हालांकि, संबंधित अधिकारी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।
ट्रक मालिक अभयराज शुक्ला के अनुसार, शनिवार देर रात लगभग 11 बजे उनका ट्रक भरतकूप से गिट्टी लादकर सिंहपुर जा रहा था। रास्ते में अतर्रा एसडीएम राहुल द्विवेदी की टीम ने ट्रक को रोक लिया।
आरोप है कि जांच के दौरान ट्रक को ओवरलोड बताकर सीज करने की धमकी दी गई। कार्रवाई से बचने के लिए एक बड़ी रकम की मांग की गई। ट्रक चालक ने सभी वैध दस्तावेज और कांटा रसीद दिखाए, लेकिन कथित तौर पर बात नहीं बनी। चालक ने तुरंत मालिक को सूचना दी।
मौके पर पहुंचे ट्रक मालिक अभयराज शुक्ला का आरोप है कि उन्हें बताया गया कि गाड़ी सीज होने पर डेढ़ लाख रुपये तक का नुकसान होगा, इसलिए समझौता कर लिया जाए। मालिक के अनुसार, नकद राशि उपलब्ध न होने पर ऑनलाइन भुगतान का विकल्प दिया गया। आरोप है कि एसडीएम के ड्राइवर मोनू यादव ने एक स्कैनर उपलब्ध कराया, जिसके जरिए 42 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। इसके बाद ट्रक को छोड़ दिया गया।
इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला हो सकता है। वहीं, एसडीएम राहुल ने सभी आरोपों को निराधार बताया है।
उन्होंने कहा, कि वे नियमित रूप से क्षेत्र में वाहनों की चेकिंग करते हैं और नियमों के अनुसार कार्रवाई भी की जाती है। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। ट्रक मालिक ने सोमवार को अतर्रा कोतवाली और मंडलायुक्त से लिखित शिकायत करने की बात कही है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सच्चाई सामने आती है और प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।

