कुदरत का खेल भी कितना अजीब और बेरहम है भाई, कि जिस आवाज़ ने तीन दशकों तक करोड़ों हिंदुस्तानियों के सुख-दुख में संगीत का मरहम लगाया, आज वो खुद एक ऐसी गंभीर बीमारी से लड़ रही हैं जहाँ उनकी सुनने की क्षमता ही लगभग जा चुकी है! 🥹💔🎵
मशहूर प्लेबैक सिंगर अलका याग्निक जी को राष्ट्रपति भवन में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘पद्म भूषण’ से नवाजा गया है। पिछले दो सालों से वे बीमारी के चलते चकाचौंध की दुनिया, मीडिया और कैमरों से बिल्कुल दूर थीं। लेकिन जब वे भारी मन और अटूट हौसले के साथ इस सम्मान को लेने मंच पर आईं, तो पूरा देश भावुक हो उठा।
बीमारी के इस सबसे मुश्किल मोड़ पर अलका जी का यह बयान सीधे कलेजे को चीर देता है:
“आज जब मैं देश का यह सर्वोच्च सम्मान ‘पद्म भूषण’ लेने के लिए बाहर निकली, तो मेरा दिल कृतज्ञता से भरा हुआ था। भले ही इस पर मेरा नाम लिखा हो, लेकिन यह सम्मान मेरे उन करोड़ों श्रोताओं का है जिन्होंने मेरी आवाज़ को अपने जीवन में जगह दी। यह पल मेरे लिए सिर्फ़ एक अवॉर्ड नहीं, बल्कि उस ताकत की याद दिलाता है जो मुझे आपकी दुआओं, उम्मीद और हिम्मत से मिलती है।”
सोचिए भाई, एक सिंगर के लिए उसके कान और उसकी सुनने की क्षमता ही उसकी सबसे बड़ी दौलत होती है। इस उम्र में आकर अचानक ऐसी बीमारी से घिर जाना किसी भी कलाकार को अंदर से तोड़ सकता है। लेकिन अलका जी ने हार मानने के बजाय बहुत ही खामोशी और मज़बूती से इस दर्द का सामना किया है। वे धीरे-धीरे ठीक होने की कोशिश कर रही हैं और उनका यह सामने आना उनके करोड़ों फैंस के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है।
आज भले ही उनके कानों तक दुनिया का शोर ठीक से न पहुँच पा रहा हो, लेकिन राष्ट्रपति भवन में उनके लिए जो तालियां गूंजी हैं और सोशल मीडिया पर जो करोड़ों फैंस की दुआएं उमड़ रही हैं, उसकी गूंज सीधे उनके दिल तक ज़रूर पहुँचेगी।
सुरों की इस अमर जादूगरनी के इस अदम्य साहस, उनकी सादगी और देश के संगीत में उनके ऐतिहासिक योगदान को झुककर कड़क सलाम! हम सब भगवान से दुआ करते हैं कि हमारी पसंदीदा आवाज़ जल्द से जल्द पूरी तरह ठीक होकर लौटे।

