–वन विभाग लेता है रेस्क्यू में मदद, जाबुल अब तक 55 स्कूलों में चला चुके हैं जागरूकता अभियान
–जिले में मौजूद 14 प्रजातियों में से सिर्फ कोबरा, करैत और रसेल वाइपर ही हैं जानलेवा; जाबुल 3000 सांपों को दे चुके हैं जीवनदान
संभल, 13 अगस्त। बारिश का मौसम ग्रामीण इलाकों में हरियाली के साथ-साथ ‘सर्पदंश’ का खौफ भी लेकर आता है। पूरे देश में हर साल करीब 50 से 60 हजार लोग सांप काटने से जान गंवा देते हैं। वन विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियानों के साथ जिले के एक क्षेत्रीय ‘स्नेक सेवर’ जियाउल हक उर्फ जाबुल अपनी व्यक्तिगत क्षमता से जनसेवा की एक बड़ी मिसाल पेश कर रहे हैं। वन विभाग जब भी सांप निकलने की सूचना पाता है, तो रेस्क्यू के लिए आधी रात को भी जाबुल दौड़ पड़ते हैं।
खुद मौत से लड़े, फिर भी नहीं छोड़ा जनसेवा का जज्बा
करीब एक महीने पहले मऊ भूर, पोस्ट चन्दनकती निवासी जाबुल खुद रेस्क्यू के दौरान एक खतरनाक कोबरा का शिकार हो गए थे। उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें 25 एंटी-वेनम इंजेक्शन लगाने पड़े और वह मौत के मुंह से वापस लौटकर आए। इसके बावजूद उनका हौसला नहीं टूटा। बिना किसी प्रशासनिक या विभागीय फंड के, वह अब तक तीन हजार से अधिक सांपों को सुरक्षित जीवनदान दे चुके हैं और 55 से ज्यादा स्कूलों में बच्चों व ग्रामीणों को जागरूक कर चुके हैं। हाल ही में जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने उनसे मुलाकात कर उनके कार्यों की सराहना की है।
जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल की ओर से सर्पदंश बचाव एडवाइजरी
स्नेक सेवर जाबुल के जमीनी अनुभवों को संज्ञान में लेते हुए, जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने संभल के नागरिकों के लिए सर्पदंश से बचाव की एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि बारिश के मौसम में जब खेतों और बिलों में पानी भर जाता है, तो सांप सूखी जगह और चूहों-मेंढकों की तलाश में कच्चे मकानों, छप्परों और लकड़ियों के ढेर में छिप जाते हैं। जिले में सांपों की करीब 14 से 15 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से सिर्फ कोबरा, रसेल वाइपर और कॉमन करैत ही जानलेवा हैं। कोबरा नर्वस सिस्टम को जाम करता है, रसेल वाइपर खून को थक्का बनाता है, और ‘साइलेंट किलर’ कॉमन करैत रात में बिस्तर में घुसकर काटता है जिसका दर्द सिर्फ मच्छर काटने जैसा होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिषखोपड़ा (गोह) और घर की छिपकली को लेकर भारी अंधविश्वास है, जबकि सच यह है कि भारत में चार पैरों वाला ऐसा कोई भी जीव जहरीला नहीं होता, इसलिए अज्ञानतावश इन्हें न मारें।
अस्पताल ही है असली जीवनरक्षक, इन गलतियों से बचें
एडवाइजरी में बताया गया है कि सर्पदंश के मामलों में सबसे ज्यादा मौतें झाड़-फूंक में बर्बाद होने वाले समय और गलत प्राथमिक उपचार के कारण होती हैं। सांप काटने पर इंसान के पास 30 से 40 मिनट का ‘गोल्डन आवर’ होता है। इस दौरान मरीज को बिल्कुल घबराने न दें, क्योंकि दिल की धड़कन तेज होने से जहर तेजी से फैलता है। घाव को तुरंत पानी और एंटीसेप्टिक साबुन से धोएं और थोड़ा ऊपर हल्का कपड़ा (जैसे दुपट्टा या गर्म पट्टी) बांध लें। घाव को कभी ब्लेड से न काटें और न ही वहां कसकर रस्सी बांधें, क्योंकि इससे खून का दौरा रुकने से अंग खराब हो सकता है और अचानक रस्सी खोलने पर जहर सीधे दिल पर हमला कर सकता है। प्राथमिक उपचार के बाद मरीज को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल लेकर जाएं, जहां सांप के जहर का एकमात्र इलाज ‘एंटी-वेनम’ 24 घंटे मुफ्त उपलब्ध है। अगर विषहीन सांप ने भी काटा हो, तब भी एहतियात के तौर पर टिटनेस का इंजेक्शन लगवाना जरूरी है।

