नहर टूटने के कारण करीब 50 बीघा गेहूं की फसल जलमग्न हो गई,
फसल खराब होने से कई किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी,
पीड़ित किसानों में उमाशंकर शुक्ला, गिरीश चंद्र शुक्ला, सुभाष चंद्र शुक्ला सहित कई लोग शामिल हैं।
निदे सरोज, हरि शरण शुक्ला, कृष्ण कुमार शुक्ला की फसल भी पानी में डूब गई,
सूर्य नारायण शुक्ला और दिनेश नारायण शुक्ला समेत अन्य किसानों की फसल भी नष्ट हुई,
घटना की सूचना ग्रामीणों ने नहर विभाग के जेई व डायल 112 को कई बार दी,
शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जेई ने नहर में आ रहे पानी को तत्काल बंद कराया,
जेई के निर्देश पर जेसीबी मशीन मंगाकर टूटी नहर की मरम्मत कराई गई,
मरम्मत के बाद खेतों में जा रहा पानी पूरी तरह बंद कराया गया,
यह नहर बाघराय से चलकर लेहरा तक जाती है,
बाघराय से आगे के गांव के ग्रामीणों द्वारा नहर में भोज के झूठे पत्तल और कूड़ा करकट फेंका जाता है,
कूड़ा जमा होने से नहर ओवरफ्लो होकर बार-बार टूट जाती है,
नहर विभाग द्वारा कई बार मजदूर लगाकर कूड़ा साफ कराया गया,
इसके बावजूद लोग नहर में कूड़ा फेंकने से बाज नहीं आ रहे हैं,
लापरवाही का खामियाजा आगे के गांवों के किसानों को भुगतना पड़ रहा है,
विगत कई वर्षों से किसानों को हर बार अपनी फसल की बलि देकर इसकी कीमत चुकानी पड़ती है,
ग्रामीणों ने नहर में कूड़ा फेंकने पर रोक लगाने की मांग की है,

