बिहार की बांकीपुर और मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद से उत्तर प्रदेश में भी सियासी हलचल काफी तेज हो गई है। तमाम राजनीतिक विश्लेषक 2027 के यूपी चुनाव के ठीक पहले इसे एक बड़े फ्लोर टेस्ट के रूप में देख रहे हैं।
नवभारत टाइम्स ऑनलाइन की टीम ने चुनाव के मद्देनजर मऊ जिलेकी भी नब्ज को टटोलने का प्रयास किया। टीम ने भाजपा के उन वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से बातचीत की जिन्होंने 2014 से पहले केंद्र में मोदी सरकार को लाने के लिए रात-दिन एक किया। 2017 में भाजपा की जीत के लिए पिच तैयार की, लेकिन आज अन्य दलों से आए बाहरी नेताओं के कारण अपने ही पार्टी में उपेक्षा के शिकार बने हुए हैं। भाजपा के लिए समर्पित इन नेताओं में से जहां कुछ की पीड़ा उनके फेसबुक पेज से देखने को मिली, वहीं कुछ ऐसे भी नेता मिले जिन्होंने समय पर भरोसा जताते हुए आगामी चुनाव में ताकत दिखाने की बात कही। कुछ ऐसे नेता भी मिले जो अपने संघर्षों को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि क्या करें अपनी पीड़ा किससे कहें? नौकरशाही इतनी हावी है कि हम जनता की बात उन तक नहीं रख सकते। मंत्रीगण अपने लोगों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें हम लोगों की सुध लेने का समय ही नहीं मिल पाता। जाने पर सिर्फ आश्वासन मिल जाता है वो भी बाहरी दलों से आए राजनेताओं के द्वारा।

