उद्घाटन के महज 24 दिनों के भीतर 4,700 करोड़ रुपये की लागत से बना एक्सप्रेस-वे जगह-जगह धंसने लगे, तो निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदार एजेंसियों पर सवाल उठना तो लाजमी है. ताजा मामला लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे का है, जिसे लगभग 74 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया है. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड (PNC Infratech Limited) के काम पर सवाल खड़े हो रहे हैं और जिसे ‘खराब प्रदर्शन’ की श्रेणी में डालने की बातें उठ रही हैं, उसी कंपनी पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण मेहरबान नजर आ रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया जा रहा है कि NHAI ने उसी दौरान PNC इंफ्राटेक को 3,483 करोड़ रुपये के दो नए बड़े हाईवे प्रोजेक्ट्स सौंप दिए हैं.
63 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे देश का पहला ‘बैरियर-लेस’ कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे है. इसका शिलान्यास 5 जनवरी 2022 को हुआ था और करीब 1650 दिनों के लंबे इंतजार के बाद 13 जुलाई 2026 को इसका भव्य उद्घाटन किया गया था. उद्घाटन के समय केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़े दावे करते हुए कहा था कि हमारे हाईवे अमेरिका से भी बेहतर बनेंगे और उनके विभाग में फंड की कोई कमी नहीं है. लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से जुदा नजर आई.
उद्घाटन के महज 14 दिन बाद (26 जुलाई) ही उन्नाव के कोरारी क्षेत्र (किमी 64 के पास) सड़क धंस गई. इसके ठीक 10 दिन बाद उन्नाव के पास किलोमीटर संख्या 30.6 पर एक्सप्रेस-वे का एक और बड़ा हिस्सा धंस गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ था. 4,700 करोड़ रुपये की लागत से बने एक्सप्रेस-वे पर इस तरह से पैबंद लगाने की नौबत आने से यात्रियों की सुरक्षा और निर्माण सामग्री के स्टैंडर्ड पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.
सड़क धंसने के मामले में शुरुआती लीपापोती के बाद NHAI ने प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटा दिया और उन्हें अगले दो साल के लिए डिबार कर दिया. NHAI का कहना था कि पुल के ऊपर केवल डामर (बिटुमिनस) की ऊपरी परत खिसकी थी और पुल का मुख्य ढांचा सुरक्षित है. लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल निचले स्तर के इंजीनियरों पर कार्रवाई काफी है?
एक तरफ जहां निर्माण कंपनी के घटिया काम पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेजों (स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी) से खुलासा हुआ है कि 16 जुलाई 2026 को कंपनी ने NHAI के साथ 3,483 करोड़ रुपये के दो नए हाइब्रिड एन्नुटी मोड (HAM) प्रोजेक्ट्स का समझौता साइन किया है.
रिपोर्ट्स की मानें तो इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेडकी भूमिका और एनएचएआई द्वारा दिए गए नए ठेकों को लेकर आया है. एक तरफ जहां 4,700 करोड़ के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे के घटिया निर्माण को लेकर पीएनसी इनफ्राटेक को ‘नॉन-परफॉर्मर’ (खराब प्रदर्शन करने वाली कंपनी) घोषित करने की बातें हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ एनएचएआई ने इसी कंपनी पर मेहरबानी दिखाई है.
आधिकारिक दस्तावेजों (कंपनी द्वारा शेयर बाजारों BSE/NSE को भेजी गई 17 जुलाई 2026 की रिपोर्ट) के अनुसार, 16 जुलाई 2026 की देर शाम पीएनसी इनफ्राटेक ने एनएचएआई के साथ 3,483 करोड़ रुपये के दो नए ‘हाइब्रिड एंनुटी मोड’ प्रोजेक्ट्स के रियायत समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं:

