पार्टी ने राज्यसभा में अपने डिप्टी लीडर पद से राघव चड्ढा को हटाने का फैसला लिया है और उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी देने के लिए राज्यसभा सचिवालय को पत्र भेजा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी ने यह भी कहा है कि अब राघव चड्ढा को AAP के कोटे से सदन में बोलने का समय न दिया जाए।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से पार्टी की गतिविधियों और बड़े आयोजनों में कम नजर आ रहे थे। कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले चड्ढा ने पंजाब और दिल्ली की राजनीति में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन हाल के दिनों में उनके साइडलाइन होने की चर्चाएं तेज थीं।
हालांकि, अशोक मित्तल ने इसे “सामान्य प्रक्रिया” बताया है और कहा है कि पार्टी सभी नेताओं को मौका देती है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह बदलाव कई सवाल खड़े कर रहा है—क्या यह सिर्फ एक रूटीन बदलाव है, या फिर AAP के अंदर कुछ बड़ा चल रहा है?

