1996 के लोकसभा चुनाव में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। सबसे बड़े दल के नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ तो ले ली, लेकिन सरकार को लोकसभा में विश्वास मत हासिल करना था। 28 मई 1996 को विश्वास मत पर चर्चा के दौरान पूरे देश की नज़र संसद की कार्यवाही पर टिकी हुई थी।
इसी ऐतिहासिक बहस के दौरान आदरणीय नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव जी पहली बार लोकसभा में सांसद के रूप में अपना संसदीय भाषण देने के लिए खड़े हुए। उनके खड़े होते ही सदन का माहौल बदल गया। नारे और शोर से पूरा सदन गूँज उठा। कार्यवाही कुछ समय तक बाधित रही और स्थिति ऐसी बनी कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को स्वयं खड़े होकर सदन को शांत करने की अपील करनी पड़ी। उसी दौरान उन्होंने कहा”जाहिर तौर पर मुलायम सिंह जी की मौजूदगी उत्तेजना पैदा करती है।”
यह कोई साधारण क्षण नहीं था। यह उस जननेता की पहली संसदीय गूँज थी, जिसकी आवाज़ में किसानों का दर्द, गरीबों का विश्वास, मज़दूरों का संघर्ष, पिछड़ों का सम्मान और लोकतंत्र की ताक़त बोलती थी। संसद में उनका पहला भाषण केवल शब्दों का संबोधन नहीं, बल्कि जनभावनाओं की बुलंद अभिव्यक्ति था।
आज भी जब उस ऐतिहासिक भाषण का वीडियो देखा जाता है, तो महसूस होता है कि आदरणीय नेताजी करोड़ों लोगों के विश्वास, संघर्ष और समाजवादी विचारधारा के सबसे सशक्त प्रतीक थे।
28 मई 1996 भारतीय संसद का एक ऐतिहासिक अध्याय
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