–जिले में इस वर्ष 21 लाख से अधिक पौधरोपण का लक्ष्य, सीएम के निर्देश पर पूरे प्रदेश में रोपे जाएंगे 5 करोड़ से ज्यादा वृक्ष
–नदी संरक्षण के लिए यूएनईपी व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के साथ पांच हजार किसान आए आगे, प्राकृतिक खेती से दोगुनी होगी आय
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुरादाबाद में एक व्यापक पर्यावरण संरक्षण और नदी पुनरुद्धार महाभियान का आगाज हुआ है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर चल रही इस वृहद कार्ययोजना के तहत जिले में इस वर्ष 21 लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 4 लाख 14 हजार पौधे आज रोपे गए। यह पूरे उत्तर प्रदेश में 5 करोड़ पौधे लगाने के वृहद लक्ष्य का एक अहम हिस्सा है।
पर्यावरण दिवस के मौके पर कान्हा गौशाला और आदमपुर ग्राम में ढेला नदी के तट पर विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान जिलाधिकारी डॉ राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि एक वृक्ष अपने 50 वर्ष के औसत जीवनकाल में 50 लाख रुपये से अधिक का भौतिक लाभ (ऑक्सीजन व प्रदूषण नियंत्रण) देता है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं (यूएनईपी, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के सहयोग से एग्रीकल्चर वाटर मैनेजमेंट (कृषि जल प्रबंधन) परियोजना को भी गति दी गई है, जिससे नदियों के संरक्षण के साथ-साथ प्राकृतिक खेती के जरिए किसानों की आय दोगुनी की जा सके।
50 लाख रुपये का रिटर्न देता है एक पेड़
विश्व पर्यावरण दिवस पर मुरादाबाद नगर निगम की कान्हा गौशाला में महापौर विनोद अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्षा शैफाली चौहान, जिलाधिकारी, डीएफओ और सीडीओ समेत कई अधिकारियों की उपस्थिति में पौधरोपण किया गया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बेहद वैज्ञानिक और आकर्षक संदेश दिया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि 50 वर्ष के औसत जीवनकाल में एक वृक्ष मानव जाति को 50 लाख रुपये से अधिक की भौतिक उपलब्धि देता है। इसमें ऑक्सीजन के उत्पादन से लेकर प्रदूषण (पॉल्यूशन) को सोखने की अहम क्षमता शामिल है। यह आंकड़ा लोगों को यह समझाने के लिए साझा किया गया कि वृक्ष केवल छाया नहीं देते, बल्कि वे हमारे जीवन का आधार और सबसे बड़ा निवेश हैं।
ढेला और रामगंगा के बेसिन को बचाने की महामुहिम
डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम को नदियों से जोड़ते हुए आदमपुर ग्राम में ढेला नदी के किनारे सुबह 8 बजे हरिशंकरी (पीपल, पाकड़ और बरगद) का रोपण किया गया। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य नदी के कैचमेंट (बेसिन) क्षेत्र को सुरक्षित रखना और जल प्रवाह को निरंतर बनाए रखना है। कार्यक्रम में यूएनईपी, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और परिवर्तन ‘द चेंज’ एनजीओ ने हिस्सा लिया। नैनीताल से निकलने वाली रामगंगा नदी, जो मुरादाबाद में लगभग 80 किलोमीटर का सफर तय करती है, उसके संरक्षण के लिए भी एक ठोस रणनीति तैयार की गई है। योजना के तहत उद्गम स्थल से लेकर प्रवाह क्षेत्र तक नदी में गिरने वाले ‘प्वाइंट’ और ‘नॉन-प्वाइंट’ दोनों तरह के प्रदूषण स्रोतों को पूरी तरह से रोकने पर काम किया जाएगा।
पांच हजार किसानों के साथ ‘एग्रीकल्चर वाटर मैनेजमेंट’
नदियों के प्रवाह को बचाने के साथ-साथ इस कार्ययोजना का एक बड़ा फोकस किसानों की आर्थिक तरक्की पर भी है। एग्रीकल्चर वाटर मैनेजमेंट (कृषि जल प्रबंधन) योजना के माध्यम से कृषकों को इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है। वर्तमान में ठाकुरद्वारा तहसील में लगभग 5000 किसान एनजीओ के साथ मिलकर इस दिशा में काम कर रहे हैं और इसका विस्तार उत्तराखंड तक किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक खेती (नेचुरल फार्मिंग) को बढ़ावा देना है, जिससे भूमि की उर्वरता (फर्टिलिटी) लंबे समय तक बनी रहे। प्रशासन और संस्थाओं का मानना है कि यदि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ मिलकर इस मॉडल पर सही से काम किया जाए, तो न केवल किसानों की आय दोगुनी होगी, बल्कि ढेला और रामगंगा नदियां अपने पुराने स्वच्छ और प्राकृतिक स्वरूप में वापस लौट सकेंगी।

