उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जंक्शन के सिटी साइड स्थित सफेद संगमरमर की मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई का खतरा गहराता जा रहा है. रेलवे प्रशासन ने मस्जिद को अवैध निर्माण बताते हुए नोटिस जारी कर 27 अप्रैल तक इसे हटाने का निर्देश दिया है. नोटिस में साफ कहा गया है कि यह मस्जिद रेलवे की जमीन पर बनी हुई है और जंक्शन के सिटी साइड में चल रहे मॉडिफिकेशन कार्य में बाधा उत्पन्न कर रही है. दरअसल, रेलवे प्रशासन के अनुसार, स्टेशन के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए यह क्षेत्र खाली कराया जाना आवश्यक है. नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक मस्जिद नहीं हटाई गई, तो रेलवे खुद कार्रवाई करेगा और इसका पूरा खर्च मस्जिद कमेटी से वसूला जाएगा. वहीं, इस कार्रवाई की आशंका के बीच मस्जिद कमेटी ने रेलवे के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है. मस्जिद कमेटी के सचिव एम.ए. परवेज ने कहा कि यह नोटिस पूरी तरह बेबुनियाद है और तथ्यों पर आधारित नहीं है. उनका दावा है कि मस्जिद रेलवे की जमीन पर नहीं, बल्कि वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर बनी है.
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परवेज के मुताबिक, यह मस्जिद वर्ष 1950 में वक्फ संपत्ति के रूप में विधिवत पंजीकृत है और इसका धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व भी है. उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 1961 में भारत सरकार के तत्कालीन उप रेलमंत्री शाहनवाज खान के प्रयासों से इस मस्जिद का पुनरुद्धार कराया गया था, जो इसकी वैधता और ऐतिहासिक पहचान को मजबूत करता है. कमेटी का कहना है कि उन्होंने रेलवे के संबंधित अधिकारियों को अपना जवाब दे दिया है और अब वे इस नोटिस को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं. उनका मानना है कि बिना उचित जांच और दस्तावेजों के आधार पर इस तरह की कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है. इस पूरे मामले ने अब कानूनी और प्रशासनिक विवाद का रूप ले लिया है. एक तरफ रेलवे अपने विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ मस्ज़िद कमेटी इसे धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए बचाने की कोशिश में जुटी है. आने वाले दिनों में यह मामला अदालत में पहुंच सकता है, जहां अंतिम फैसला तय करेगा कि मस्जिद रहेगी या हटेगी.
प्रयागराज जंक्शन की संगमरमर मस्जिद पर बुलडोजर का खतरा, रेलवे के नोटिस के खिलाफ कोर्ट जाएगी कमेटी
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