और कभी-कभी वही दिन सबसे ज्यादा डरावना भी बन जाता है।
कुमरगंज, पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया, जहां BJP उम्मीदवार सुभेंदु सरकार पर कथित तौर पर हमला किया गया। उनका दावा है कि कई बूथों पर उनके एजेंट्स को जबरन बाहर निकाला गया था। जब वो खुद बूथ नंबर 24 पर स्थिति देखने पहुंचे, तभी उन पर और उनकी टीम पर हमला कर दिया गया। हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें खेतों के रास्ते भागकर जान बचानी पड़ी, जबकि उनकी गाड़ी भी तोड़ दी गई।
इस घटना ने एक बार फिर चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि TMC कार्यकर्ताओं ने डर और दबाव का माहौल बनाने की कोशिश की, जबकि मौके पर केंद्रीय बल मौजूद होने के बावजूद हालात काबू से बाहर हो गए। ये सिर्फ एक उम्मीदवार पर हमला नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा सवाल है।
सवाल सीधा है—अगर वोट डालने का हक ही डर के साये में हो, तो लोकतंत्र कितना मजबूत रह जाता है? चुनाव सिर्फ जीत-हार नहीं, भरोसे की परीक्षा भी होते हैं… और ऐसी घटनाएं उस भरोसे को कमजोर करती हैं।

