यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए पंकज चौधरी के नामांकन के दौरान एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत मिला। इस कार्यक्रम में अमेठी से सांसद रहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की सक्रिय उपस्थिति को उनकी दूसरी राजनीतिक पारी के आगाज के तौर पर देखा जा रहा है। स्मृति ईरानी के लिए पिछला एक साल राजनीतिक रूप से कठिन रहा है। अमेठी से लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने राजनीतिक मंचों और कार्यक्रमों से एक तरह से दूरी बना ली थी। यहां तक की अपने पुराने टीवी सीरियल की शूटिंग में भी व्यस्त हो गई थीं। ऐसे में कहा जा रहा था कि वह राजनीति से टीवी और मनोरंजन की दुनिया में वापस हो गई हैं। उनकी सियासी गलियारे से दूरी और राजनीतिक निष्क्रियता कई तरह के कयासों को जन्म दे रही थी।
लोकसभा चुनाव हारने के बाद यूपी बीजेपी अध्यक्ष के नामांकन के लिए पहला बड़ा संगठनात्मक कार्यक्रम था, जिसका स्मृति ईरानी हिस्सा बनीं। स्मृति ईरानी इस अवसर पर न सिर्फ मौजूद रहीं बल्कि उन्हें मुख्य मंच पर जगह मिली और पंकज चौधरी के प्रस्तावकों में शामिल रहीं। मंच पर केवल आठ लोगों को ही जगह मिली थी। इसमें केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े, प्रदेश भाजपा चुनाव प्रभारी डॉक्टर महेंद्र नाथ पांडेय के अलावा सीएम योगी और दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के अलावा कैबिनेट मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह और स्मृति ईरानी को ही जगह मिली। जबकि कार्यक्रम में यूपी के कई कैबिनेट मंत्री भी मौजूद थे।
राजनीतिक जानकार और विश्लेषक स्मृति ईरानी को इस तरह से सक्रिय भूमिका निभाने को उनकी दूसरी सियासी पारी के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। उनका मानना है कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश नेतृत्व अब भी उनके राजनीतिक उपयोग की संभावनाएं बनाए रखे हुए है। उनका मानना है कि स्मृति अमेठी से भले ही चुनाव हार गईं हों, लेकिन वह आज भी राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का एक प्रमुख चेहरा हैं। उनकी छवि एक तेजतर्रार वक्ता की है, जो विपक्ष को मजबूती से घेर सकती हैं। उन्हें संगठनात्मक प्रक्रिया में शामिल करके पार्टी महिला कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को एक संदेश देना चाहती है।
यह संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में पार्टी स्मृति ईरानी को किसी नई संगठनात्मक जिम्मेदारी या राज्य सभा जैसे उच्च सदन के माध्यम से फिर से सक्रिय कर सकती है। पंकज चौधरी के नामांकन में उनकी प्रस्तावक की भूमिका, एक तरह से पार्टी की ओर से उन्हें सार्वजनिक मंच पर फिर से स्थापित करने का पहला कदम माना जा रहा है।

