सम्भल में आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन में उपस्थित होने और समाज के प्रबुद्धजनों के बीच अपने विचार साझा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। समाज की एकता और राष्ट्र निर्माण में हमारी भूमिका सदैव अग्रणी रही है और आज के परिदृश्य में यह और भी आवश्यक हो गया है कि हम अपनी बौद्धिक शक्ति का उपयोग सामाजिक विसंगतियों के विरुद्ध करें।
सम्मेलन के दौरान मैंने शिक्षा जगत में लागू किए जा रहे UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 के प्रति अपनी गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं।
इन नियमों को ‘काले नियम’ कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा,
इन नियमों के तहत गठित होने वाली कमेटियों में सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों और शिक्षकों के प्रतिनिधित्व को स्पष्ट रूप से नज़रअंदाज़ किया गया है, जो समानता के अधिकार का उल्लंघन है
झूठी शिकायतों के विरुद्ध किसी दंडात्मक प्रावधान का न होना शैक्षणिक परिसरों में विद्वेष और असुरक्षा की भावना पैदा कर सकता है।
यूजीसी नियमों में पहले से ही स्वर्ण समाज के छात्रों को स्वघोषित अपराधी मान लिया गया है
शिक्षा का मंदिर ज्ञान और एकता का केंद्र होना चाहिए, न कि जातियों के आधार पर भेदभाव और अलगाव का।
उच्चतम न्यायालय द्वारा इन नियमों पर रोक लगाना इस बात का प्रमाण है कि प्रथम दृष्टया ये नियम संवैधानिक मूल्यों के अनुकूल नहीं हैं। एक अधिवक्ता और जागरूक नागरिक होने के नाते, मेरा यह स्पष्ट मत है कि न्याय वह है जो सबके लिए समान हो, न कि वह जो समाज के एक बड़े वर्ग को हाशिए पर धकेल दे।
सम्भल ब्राह्मण सम्मेलन में व्यक्त किए गए UGC 2026 नियमों पर गंभीर आपत्तियां
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