बिसौली। मुक़द्दस माह ए रमजान का दूसरा अशरा चल रहा है। अल्लाह रब्बुल इज्जत इस अशरे में बहुत से लोगों की मगफिरत फरमाता है। मस्जिद के इमाम मौलाना अफलाक़ रजा उवैसी ने बताया कि दूसरे अशरे को मगफिरत का अशरा कहा जाता है। इस अशरे में रोजेदार रोजे रखकर अल्लाह से मगफिरत की दुआ मांगते हैं। यूं तो रमजान का पूरा महीना मोमिनों के लिए अल्लाह की तरफ से अजमत वाला व रहमतों और बरकतों से लबरेज है, लेकिन अल्लाह ने इस मुबारक महीने को तीन अशरों में तकसीम किया है। पहला अशरा रहमत वाला है, जिसमें खुदा की रहमत नाजिल होती है। दूसरा असरा रमजान के 20 वें रोजे के सूरज डूबने तक रहेगा। दूसरे अशरे में रोजेदार रोजे रखकर अल्लाह से मगफिरत की दुआएं करते हैं। अपनी मगफिरत, मां-बाप की मगफिरत, रिश्तेदारों की मगफिरत और उम्मत के लिए कसरत से दुआ ए मगफिरत की जाए। उन्होंने कहा कि यह समय खुद को गुनाहों से पाक करने और अपनी गलतियों की माफी मांगने का सबसे बेहतरीन मौका है। उन्होंने कहा कि इस महीने में गरीब और जरूरतमंदों की मदद करना अल्लाह को बेहद पसंद है। उन्होंने मोमिनों से इस अशरे में ज्यादा से ज्यादा इबादत करने और तौबा इस्तिग़फार यानी गुनाहों से माफी मांगने की अपील की।

