मैनपुरी। कचहरी रोड स्थित रज्जो देवी कबीर आश्रम में रविवार को आश्रम के महंत अमर साहब की अध्यक्षता में आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में बड़ी संख्या में संतों एवं श्रद्धालुओं ने भाग लेकर संतवाणी का श्रवण किया।
महंत अमर साहब ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य को सारग्राही बनना चाहिए। जहां से भी सद्गुण प्राप्त हों, उन्हें विनम्रतापूर्वक ग्रहण करना चाहिए तथा अपने भीतर के दुर्गुणों का त्याग करना चाहिए। यही सच्चे सुख, शांति और सफल जीवन की कला है। उन्होंने कहा कि बाहरी धन, पद और प्रतिष्ठा क्षणिक सुख देते हैं, जबकि वास्तविक सुख मन की निर्मलता और आत्मिक शुद्धता में निहित है।
उन्होंने कहा कि जब मन भक्ति, सेवा, त्याग और प्रेम के रंग में रंग जाता है, तब जीवन में अनंत सुख और शांति का अनुभव होता है। मानव जीवन का उद्देश्य आत्मकल्याण करते हुए सद्गुरु के बताए मार्ग पर चलना है।
महंत अमर साहब ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे रेत में बिखरी चीनी को हाथी नहीं चुन सकता, लेकिन छोटी-सी चींटी उसे आसानी से चुन लेती है। उसी प्रकार संसार में सद्गुण और दुर्गुण दोनों मौजूद हैं। विवेकवान व्यक्ति सद्गुणों को अपनाता है, जबकि अविवेकी व्यक्ति बुराइयों की ओर आकर्षित होता है। उन्होंने मधुमक्खी और साधारण मक्खी का उदाहरण देते हुए कहा कि मधुमक्खी फूलों से मधु ग्रहण करती है, जबकि साधारण मक्खी गंदगी की तलाश करती है। इसलिए मनुष्य को सदैव अच्छाइयों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने संत कबीर का प्रसिद्ध दोहा उद्धृत करते हुए कहा— “साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय, सार-सार को गहि रहे, थोथा देइ उड़ाय।” अर्थात श्रेष्ठ व्यक्ति वही है जो सार्थक और श्रेष्ठ बातों को ग्रहण करे तथा व्यर्थ और बुरे विचारों का त्याग कर दे।
सत्संग में संत आत्माराम दास, सियाराम दास, प्रखर दास, कालीचरण दास, चेतन दास, कर्नल सुरेश चंद्र यादव, कैप्टन श्यामवीर सिंह, राजेंद्र दास, डॉ. गिरीश शाक्य तथा चंद्रपाल शाक्य सहित अन्य संतों एवं श्रद्धालुओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का समापन भजन-कीर्तन एवं सत्संग के साथ हुआ।
साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप स्वभाव : कबीर आश्रम में सत्संग का आयोजन
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