अभी दो दिन पहले आपने एक खबर पढ़ी होगी। मेरठ में एक लड़की का तालाक हुआ तो उसके परिवार के लोगों ने ढोल-ताशे बजवाकर उसे अपने घर ले आए थे। लड़की का नाम प्रणिता है, उनके पिता ज्ञानेंद्र शर्मा जज रहे हैं। उन्होंने कहा था कि हमारी बेटी को परेशान किया गया। हमने कोई पैसा नहीं मांगा, हमें हमारी बेटी चाहिए थी, इसलिए हम इसे अपने साथ लेकर जा रहे। महिला सशक्तिकरण का यह उदाहरण दुनिया भी देखे।
चूंकि इस तरह का मामला सामने आया तो लोगों ने लड़के पक्ष को आरोपी बना दिया। कई जगहों पर भला-बुरा कहा गया। वह भी तब जब उनका कोई पक्ष नहीं आया। अब उस पक्ष ने अपनी बात रखी है।
प्रणिता की जिससे 2018 में शादी हुई थी वह गौरव अग्निहोत्री हैं, सेना में मेजर हैं। गौरव के पिता श्याम किशोर अग्निहोत्री रिटायर्ड सूबेदार हैं। वह कहते हैं, जब से सोशल मीडिया पर ढोल-ताशे वाले वीडियो आए तब से हम लोगों का बहुत मजाक बनाया गया। इसे देखकर हमारी आंखों में आंसू आ गए। हमारे बेटे पर तो क्या ही बीत रही होगी।
श्याम कहते हैं, इस शादी में हमने कोई दहेज नहीं लिया था। लेकिन पहले दिन से हम विवाद शुरू हो गया। वो लोग सबकुछ अपनी मर्जी का करवाना चाहते थे। एक साल के अंदर ही बेटे के खिलाफ मुकदमा लिखवा दिया। हमने उत्तराखंड के चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखी, उन्होंने मामले की जांच करवाई, पता चला कि ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि या ज्ञानेंद्र इस्तीफा दें या फिर आपस में मामला सुलझा लें। मामला बाहर ही सुलझ गया।
श्याम बताते हैं, प्रणीता ने पिछले साल एक बेटे को जन्म दिया। हम सब खुश हुए। लेकिन कुछ दिन बाद प्रणिता उसे लेकर अपनी मां के घर चली गई। वहां उन्होंने बच्चे का मुंडन करवा दिया। जबकि मुंडन की जिम्मेदारी तो हमारी थी, हम अच्छे से करते। जब हमने एतराज जताया तो उन्होंने फिर से तलाक की बात कही। बेटा तलाक नहीं चाहता था लेकिन वह इतना परेशान हो गया कि उसने हां कर दिया।
श्याम कहते हैं, वो लोग कह रहे कि हमने तलाक के बाद कुछ नहीं लिया। जबकि हकीकत यह है कि हमने 3 बीघा जमीन अपनी बहू के नाम कर दी। मेरे बेटे की जो कार थी वह उन्होंने अपने पास रख ली। 55-60 लाख रुपए की ज्वेलरी थी, उसे भी उन्होंने अपने पास रख लिया। हमने तो कभी भी गुजारा भत्ता देने से मना नहीं किया।
पहली दो फोटो में प्रणिता और उनके रिटायर्ड जज पिता हैं। तीसरी फोटो में श्याम किशोर हैं। चौथी तस्वीर में मेजर गौरव और प्रणिता हैं।

