एक साधारण कपड़ों वाली महिला को टीटीई ने बिना टिकट बताकर ट्रेन से उतार दिया। लेकिन जब स्टेशन मास्टर को पता चला कि वह महिला रेलवे बोर्ड की सीनियर अधिकारी अंजलि अलुना हैं, तो पूरा स्टेशन हिल गया। उस एक गलती ने अब पूरे जोन की जांच शुरू कर दी है।
दिल्ली से लखनऊ जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन तेज रफ्तार से दौड़ रही थी। कोच नंबर ए2 में यात्री अपनी-अपनी दुनिया में मशगूल थे। कोई मोबाइल पर स्क्रॉल कर रहा था, कोई सो रहा था तो कोई परिवार के साथ खाना खा रहा था।
उसी कोच की साइड लोअर सीट पर एक साधारण कपड़ों में लगभग 35 वर्षीय महिला बैठी थी। चेहरे पर आत्मविश्वास था, लेकिन कपड़े और व्यवहार देखकर किसी को भी अंदाजा नहीं हो सकता था कि वह कोई बड़ी अधिकारी हो सकती है। वह बार-बार अपना मोबाइल चेक कर रही थी क्योंकि नेटवर्क नहीं आ रहा था। असल में वह अपने ई-टिकट का स्क्रीनशॉट खोलने की कोशिश कर रही थी।
तभी टीटीई राजेश कोच में घुसा। राजेश अपने सख्त और कठोर व्यवहार के लिए पूरे रूट पर मशहूर था। “टिकट… टिकट दिखाइए…” वह एक-एक सीट पर चेक कर रहा था। कुछ ही देर में वह उस महिला के सामने खड़ा हो गया।
“मैडम, टिकट दिखाइए।”
महिला ने विनम्रता से कहा, “जी सर, मोबाइल में है। बस एक मिनट, नेटवर्क नहीं आ रहा है।”
राजेश ने सख्त स्वर में कहा, “जल्दी कीजिए, मेरे पास टाइम नहीं है।”
महिला ने कोशिश की, लेकिन नेटवर्क नहीं आया। उसने शांत स्वर में कहा, “सर, मैं पीएनआर नंबर बता देती हूं, आप चेक कर लीजिए।”
राजेश का मूड पहले से ही खराब था। उसने तेज आवाज में कहा, “रोज यही ड्रामा होता है। बिना टिकट चढ़ जाते हैं और फिर बहाने बनाते हैं।”
महिला ने फिर कहा, “सर, मेरा टिकट कन्फर्म है। थोड़ी देर रुक जाइए।”
लेकिन राजेश ने एक पल भी नहीं सुना। उसने टिकट चार्ट देखा और जल्दबाजी में नाम नहीं मिला। उसने फैसला सुना दिया, “अगले स्टेशन पर उतरिए। बिना टिकट यात्रा अपराध है।”
कोच में सन्नाटा छा गया। कई यात्री महिला को शक की नजर से देखने लगे। महिला ने खुद को संभाला और पूछा, “आपको यकीन है कि आप सही कर रहे हैं?”
राजेश ने ठंडे स्वर में जवाब दिया, “मैं अपना काम कर रहा हूं।”
ट्रेन रामपुर रोड स्टेशन पर रुकी। राजेश ने इशारा किया और महिला बिना कुछ बोले अपना बैग उठाकर ट्रेन से उतर गई। उसके चेहरे पर नाराजगी नहीं, बल्कि एक अजीब आत्मविश्वास था।
प्लेटफॉर्म पर उतरते ही महिला ने मोबाइल देखा। अब नेटवर्क आ चुका था। टिकट पूरी तरह कन्फर्म था। उसने हल्की मुस्कान दी और एक नंबर डायल किया।
“गुड मॉर्निंग मैम… मैं बोल रही हूं ट्रेन नंबर 12578… मुझे टीटीई ने बिना टिकट बताकर उतार दिया है। मैं अभी रामपुर रोड स्टेशन पर हूं। तुरंत स्टेशन मास्टर को सूचना दीजिए।”
फोन कट गया। महिला शांत भाव से प्लेटफॉर्म की बेंच पर बैठ गई।
कुछ ही मिनटों में छोटे से रामपुर रोड स्टेशन पर हड़कंप मच गया। स्टेशन मास्टर सुरेश के फोन पर कॉल आने लगा। “क्या आपके स्टेशन पर रेलवे बोर्ड की सीनियर अधिकारी अंजलि अलुना उतरी हैं?”
सुरेश दौड़ते हुए प्लेटफॉर्म पर पहुंचा और जैसे ही उसकी नजर महिला पर पड़ी, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
महिला अब भी शांत बैठी थी। लेकिन पूरा स्टेशन हिलने वाला था और एक टीटीई की जिंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली थी।रामपुर रोड स्टेशन छोटा सा स्टेशन था। यहां आमतौर पर सिर्फ पैसेंजर ट्रेनें रुकती थी। एक्सप्रेस ट्रेन का रुकना भी कम ही होता था। लेकिन आज माहौल अलग होने वाला था। महिला प्लेटफार्म की बेंच पर बैठी शांत
नजर आ रही थी। जैसे उन्हें किसी चीज की जल्दी ही नहीं थी। लेकिन स्टेशन मास्टर के कमरे में हड़कंप मच चुका था। फोन की घंटी लगातार बज रही थी। स्टेशन मास्टर सुरेश ने जैसे ही फोन उठाया उधर से तेज आवाज आई। क्या आपके स्टेशन पर रेलवे बोर्ड की सीनियर अधिकारी उतरी हैं अभी? सुरेश चौंक गया। जी जानकारी नहीं। कौन अधिकारी? उधर से जवाब आया। नाम अंजलि वर्मा। तुरंत प्लेटफार्म चेक कीजिए। सुरेश के हाथ कांप गए। जी अभी अभी देखता हूं। वो दौड़ते हुए प्लेटफार्म पर आया और जैसे ही उसकी नजर उस महिला पर पड़ी उसका दिल धक से रह गया। वो महिला आराम से बैठी थी जैसे किसी का इंतजार कर रही हो। सुरेश ने तुरंत पास जाकर कहा मैम नमस्ते आप अंजलि मैम। महिला ने हल्की मुस्कान के साथ कहा जी सुरेश का चेहरा उतर गया। मैम आपने पहले क्यों नहींबताया? महिला ने शांत आवाज में कहा। क्यों बताना चाहिए था? सुरेश के पास कोई जवाब नहीं था। तभी महिला ने सीधे पूछा, “उस ट्रेन का टीटीई कहां है?” सुरेश घबरा गया। मैम वो ट्रेन तो निकल गई। महिला ने मोबाइल उठाया। ठीक है। ट्रेन को अगले स्टेशन पर रोकिए। सुरेश ने तुरंत कंट्रोल रूम फोन लगाया। उधर से आदेश आया। ट्रेन तुरंत अगले स्टेशन पर रोकी जाए। कुछ ही मिनट में पूरी रेलवे लाइन पर सूचना फैल गई। उधर ट्रेन में टीटीई राजेश आराम से अपनी सीट पर बैठा था। उसे लगा उसने नियम के अनुसार काम किया। अचानक गार्ड उसके पास दौड़ता हुआ आया। राजेश कंट्रोल से मैसेज आया है। ट्रेन अगले स्टेशन पर रोकी जाएगी। राजेश ने चौंक पर पूछा। क्यों? गार्ड ने धीमे स्वर में कहा। जिस महिला को उतारा था, वह रेलवे बोर्ड की अधिकारी निकली। राजेश का चेहरा सफेद पड़ गया। क्या? उसके हाथ कांपने लगे। उसे याद आया महिला ने उतरते
समय कहा था आपको यकीन है आप सही कर रहे हैं? राजेश के दिमाग में वही आवाज गूंजने लगी। ट्रेन अगले स्टेशन पर रुक गई। कुछ ही मिनट में रेलवे के सीनियर अधिकारी प्लेटफार्म पर पहुंच गए। राजेश को तुरंत नीचे बुलाया गया। वह उतरते समय ही समझ गया था मामला गंभीर है। उधर रामपुर रोड स्टेशन पर महिला अब स्टेशन मास्टर के कमरे में बैठी थी। कुछ ही देर में काली गाड़ी आकर रुकी। उसमें से कई अधिकारी उतर कर अंदर आए। सब ने एक साथ कहा, गुड आफ्टरनून मैम। स्टेशन मास्टर सुरेश यह दृश्य देखकर पसीनापसीना हो गया। उसे पहली बार एहसास हुआ कि जिनको वह साधारण महिला समझ रहा था, वह कितनी बड़ी अधिकारी हैं। महिला अंजलि अलुना ने सीधे पूछा, टीटीई आ गया। उधर से जवाब आया। जी मैम रास्ते में है। अंजलि की आंखों में अब सख्ती साफ दिख रही थी। लेकिन उनके चेहरे पर गुस्सा नहीं बल्कि एक अधिकारी वाला शांत आत्मविश्वास था। करीब 20 मिनट बाद राजेश को स्टेशन मास्टर के
कमरे में लाया गया। जैसे ही उसकी नजर अंजलि पर पड़ी उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। वो समझ चुका था अब बचना मुश्किल है। राजेश ने तुरंत हाथ जोड़ दिए। मैम मुझसे गलती हो गई। लेकिन अंजलि ने उसे रोका। गलती। कमरे में सन्नाटा छा गया। अंजलि धीरे से उठी और उसकी आंखों में देखते हुए बोली गलती तब होती है जब इंसान अनजाने में कुछ गलत कर दे। राजेश का सिर झुक गया। अंजलि की आवाज अब और सख्त हो गई। लेकिन आपने मुझे बोलने का मौका ही नहीं दिया। कमरे में मौजूद सभी अधिकारी चुप थे। अंजलि ने आगे कहा। अगर मैं अधिकारी नहीं होती तो आज क्या होता? राजेश के पास जवाब नहीं था। उसकी आंखों में डर साफ दिख रहा था। लेकिन असली तूफान अभी बाकी था। क्योंकि अंजलि अब सिर्फ अपनी बेइज्जती का नहीं पूरे सिस्टम की सच्चाई सामने लाने वाली थी। कमरे में सन्नाटा इतना गहरा था कि किसी की सांसों की आवाज तक सुनाई दे रही थी। टीटीई राजेश
सिर झुका कर खड़ा था। उसके चेहरे पर पछतावा भी था और डर भी। लेकिन अंजलि वर्मा की आंखों में सिर्फ गुस्सा
नहीं था। वो कुछ सोच रही थी। कुछ पल बाद उन्होंने शांत स्वर में पूछा। आपको याद है मैंने आपसे क्या कहा था? राजेश ने धीरे से कहा जी मैम आपने कहा था मुझे अपनी बात समझाने का मौका दीजिए। अंजलि ने सिर हिलाया और आपने क्या किया? राजेश की आवाज कांप गई। मैम मैंने आपको उतरने को कहा। अंजलि ने तुरंत कहा, नहीं आपने मुझे अपमानित करके उतारा। कमरे में बैठे अधिकारियों के चेहरे भी गंभीर हो गए। अंजलि ने आगे कहा। मैंने आपको टिकट दिखाने के लिए मोबाइल निकाला था। राजेश ने चौंक कर सिर उठाया। मोबाइल। अंजलि ने अपना फोन टेबल पर रखा। स्क्रीन ऑन की। उसमें ई टिकट साफ दिखाई दे रहा था। राजेश की आंखें फैल गई। उसके हाथ कांपने लगे। उसने
बुदबुदाते हुए कहा। मैम मुझे लगा आप बहाना बना रही हैं। अंजलि ने तेज आवाज में कहा, “क्यों लगा?” राजेश चुप हो गया। उसके पास कोई जवाब नहीं था।” कमरे में बैठे एक सीनियर अधिकारी ने धीरे से कहा, “मैम, शायद इन्हें लगा होगा।” अंजलि ने तुरंत उन्हें रोक दिया। नहीं, मैं खुद सुनना चाहती हूं। उन्होंने राजेश की तरफ देखा। क्यों लगा? राजेश की आंखों में पानी आ गया। मैम, आपकी ड्रेस साधारण थी। कमरे में मौजूद सभी लोग समझ गए असली कारण क्या था? अंजलि की आवाज अब बहुत शांत हो गई। मतलब अगर कोई साधारण कपड़े पहने तो वह झूठा होता है। राजेश रो पड़ा। मैम मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। लेकिन अंजलि अभी खत्म नहीं हुई थी। उन्होंने धीरे से कहा आज आपने मुझे उतारा क्योंकि आपको लगा मैं गरीब हूं। राजेश के दिल पर जैसे हथौड़ा
पड़ा। अंजलि ने आगे कहा। लेकिन सोचिए अगर मेरी जगह कोई बुजुर्ग महिला होती, कोई मजदूर, कोई बीमार इंसान। कमरे में बैठे सभी अधिकारी अब असहज महसूस कर रहे थे। अंजलि की आंखों में दर्द साफ दिख रहा था। आपको पता है ट्रेन से उतारे जाने के बाद मुझे प्लेटफार्म पर बैठना पड़ा। उन्होंने हल्की मुस्कान के साथ कहा। मैं अधिकारी हूं इसलिए मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई। फिर आवाज भारी हो गई। लेकिन आम आदमी का क्या? यह सवाल कमरे में गूंज गया। राजेश जमीन पर बैठ गया। मैम मुझे माफ कर दीजिए। लेकिन अंजलि ने तुरंत कहा माफी सिस्टम नहीं सुधारती। कमरे में बैठे अधिकारी अब समझ गए थे कुछ बड़ा होने वाला है। अंजलि ने अपने बैग से एक छोटा रिकॉर्डर निकाला। सब हैरान रह गए। यह क्या है मैम? एक अधिकारी ने पूछा। अंजलि ने जवाब दिया। जब से टीटीई मेरे पास आया था, मैंने रिकॉर्डिंग चालू
कर दी थी। राजेश के चेहरे का रंग उड़ गया। अंजलि ने रिकॉर्डिंग चला दी। कमरे में वही आवाज गूंजने लगी। बहाने मत बनाइए। टिकट नहीं है तो उतरिए। मैडम मुझे समझाने का मौका दीजिए। बहुत देखे हैं ऐसे लोग उतरिए। हर शब्द अब राजेश को अंदर से तोड़ रहा था। रिकॉर्डिंग खत्म हुई। कमरे में कोई बोल नहीं रहा था। अंजलि ने धीरे से कहा। यह सिर्फ एक इंसान की गलती नहीं है। उन्होंने सबकी तरफ देखा। यह सिस्टम की बीमारी है। सीनियर अधिकारी तुरंत बोले मैम हम तुरंत एक्शन लेंगे। लेकिन अंजलि ने सर हिलाया। नहीं सिर्फ सस्पेंशन से कुछ नहीं होगा। सभी चौंक गए। तो मैम अंजलि ने कहा आज मैं पूरे जोन की जांच करवाऊंगी। कमरे में बैठे अधिकारियों के चेहरे उतर गए क्योंकि इसका मतलब था बहुत लोगों की लापरवाही सामने आने वाली थी। उधर राजेश रोते हुए बोला मैम मेरी नौकरी चली जाएगी।अंजलि ने उसकी तरफ देखा और जो कहा उसने सबको हैरान कर दिया। नौकरी बच भी सकती है। राजेश ने उम्मीद से सर उठाया लेकिन अंजलि ने आगे कहा अगर आप सच बोलेंगे। राजेश समझ गया अब छिपाने का कोई फायदा नहीं। उसने कांपती आवाज में कहा, “मैम, सच यह है कि हम लोगों पर ऊपर से प्रेशर रहता है ज्यादा फाइन काटने का। कमरे में बैठे अधिकारी एक दूसरे को देखने लगे। अंजलि की आंखों में चमक आ गई क्योंकि अब सच्चाई सामने आने वाली थी। कमरे में बैठे सभी अधिकारी अब पूरी तरह सतर्क हो चुके थे। टीटीई राजेश की बात ने माहौल बदल दिया था। उसने डरते-डरते कहा, मैम हम लोगों पर रोज दबाव रहता है ज्यादा से ज्यादा फाइन काटने का। वरना ऊपर रिपोर्ट जाती है कि काम ठीक नहीं कर रहे। कमरे में बैठे कुछ अधिकारियों के चेहरे उतर गए क्योंकि बात अब सीधे सिस्टम तक पहुंच चुकी थी। अंजलि अलुना कुर्सी से उठी। उनकी आंखों में अब गुस्सा नहीं था बल्कि दृढ़ निश्चय था। उन्होंने शांत आवाज
में कहा। मतलब लक्ष्य पूरा करने के लिए निर्दोष लोगों को परेशान किया जाता है। राजेश ने सिर झुका लिया। जी मैम कई बार। एक सीनियर अधिकारी तुरंत बोला मैम ऐसा नहीं है। लेकिन अंजलि ने हाथ उठाकर उसे रोक दिया। मैं सब समझ रही हूं। फिर उन्होंने सीधे राजेश से पूछा, “क्या सिर्फ तुम या और लोग भी?” राजेश ने कांपते हुए कहा, “मैम, कई लोग।” यह सुनते ही कमरे में सन्नाटा छा गया। अंजलि ने तुरंत आदेश दिया। आज से इस जोन की स्पेशल जांच होगी। सीनियर अधिकारी चौंक गए। मैम पूरा जोन? हां, पूरा जोन। उनकी आवाज में इतना आत्मविश्वास था कि कोई विरोध नहीं कर पाया। उसी दिन शाम रेलवे ऑफिस में हड़कंप मच गया। जांच टीम बनाई गई। पिछले छ महीनों के फाइन रिकॉर्ड निकाले गए और जो सामने आया वहचौंकाने वाला था। कई मामलों में यात्रियों से बिना वजह जुर्माना लिया गया था। कुछ मामलों में टिकट होने के बावजूद फाइन काटा गया था और कुछ जगह तो सीधे रिश्वत के आरोप भी सामने आए। रिपोर्ट रात
तक अंजलि अलुना के सामने रख दी गई। उन्होंने फाइल बंद की और गहरी सांस ली। यही वजह है लोगों का भरोसा टूटता है। अगले दिन पूरे जोन में आदेश जारी हुआ। कई टीटीई सस्पेंड कुछ अधिकारियों पर विभागीय जांच और सबसे बड़ा फैसला यात्री सम्मान प्रोटोकॉल लागू किया गया। अब कोई भी अधिकारी बिना पूरी जांच के यात्री को ट्रेन से नहीं उतार सकता था। उधर राजेश वह अपने घर में बैठा था। आंखों में डर दिल में पछतावा। उसे लग रहा था अब नौकरी खत्म तभी उसके फोन पर कॉल आया ऑफिस से। वो कांपते हुए पहुंचा। कमरे में अंजलि अलुना बैठी थी। राजेश की हालत खराब हो गई। मैम मुझे माफ कर दीजिए। अंजलि ने शांत स्वर में कहा। बैठिए। राजेश बैठ गया। दिल तेजी से धड़क रहा था। अंजलि ने कहा, “आपकी गलती बहुत बड़ी थी। राजेश की आंखों में आंसू आ गए। जी मैम लेकिन अगले ही पल अंजलि ने कहा लेकिन आपने सच बोला। राजेश ने हैरानी से
सिर उठाया। मैम अंजलि ने कहा अगर आप सच नहीं बताते तो सिस्टम की बीमारी सामने नहीं आती। राजेश की आंखों से आंसू बहने लगे। अंजलि ने आगे कहा। इसलिए आपको एक मौका दिया जा रहा है। राजेश समझ ही नहीं पाया। मौका हां आपको सस्पेंड नहीं किया जाएगा लेकिन ट्रेनिंग पर भेजा जाएगा। राजेश रो पड़ा। मैम मैं जिंदगी भर याद रखूंगा। अंजलि ने गंभीर आवाज में कहा। याद रखिए वर्दी ताकत नहीं जिम्मेदारी होती है। कमरे में बैठे सभी लोग यह सुन रहे थे। कुछ महीने बाद उसी रूट पर ट्रेन चल रहीथी। राजेश फिर ड्यूटी पर था। लेकिन इस बार उसका व्यवहार बदल चुका था। वह हर यात्री से विनम्रता से बात कर रहा था। तभी एक बुजुर्ग महिला आई। टिकट ढूंढ नहीं पा रही थी। पहले वाला राजेश होता तो शायद गुस्सा करता। लेकिन अब उसने मुस्कुरा कर कहा, कोई बात नहीं आराम से ढूंढिए। पास खड़े लोग
हैरान थे। तभी पीछे से एक आवाज आई। लगता है आपने सीख लिया। राजेश मुड़ा। सामने अंजलि अलुना खड़ी थी। साधारण कपड़ों में। राजेश तुरंत सीधा खड़ा हो गया। मैम नमस्ते। अंजलि ने हल्की मुस्कान दी। अब आप सही मायनों में अधिकारी बन गए हैं। राजेश की आंखों में गर्व था। कहानी खत्म होने से पहले अंजलि के शब्द स्क्रीन पर उभरते हैं। पद बड़ा नहीं होता। व्यवहार बड़ा होता है। सिस्टम तभी बदलेगा जब इंसान बदलेगा। अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो वीडियो को लाइक जरूर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें। ऐसी ही दिल को छू लेने वाली सच्चाई से जुड़ी कहानियों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें। धन्यवाद।

