आरोप – पीड़ित ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
मनीष शर्मा स्वतंत्र पत्रकार
संभल । बहजोई पुलिस ने अपने हिसाब से लिखवाई तहरीर, लेकिन पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच में जुट गई है । गोलीकांड आपसी विवाद में युवक को मारी गोली, हालत गंभीर उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बहजोई कोतवाली क्षेत्र में स्टेशन के पास लाइन पार इलाके में आपस में खड़े कुछ युवकों के बीच विवाद हो गया। इसी दौरान एक युवक ने दूसरे युवक को तमंचे से गोली मार दी। गोली लगते ही इलाके में हड़कंप मच गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत घायल युवक को उपचार के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार देने के बाद युवक की गंभीर हालत को देखते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अस्पताल पहुंच गई और मामले की जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। पुलिस हमलावर की तलाश में जुटी है और विवाद के कारणों का पता लगाया जा रहा है। पीड़ित ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है, जांच कराकर कार्रवाई की मांग की हैं। स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ शिकायती पत्र देकर जिला सरकारी अस्पताल में मरीज के साथ लापरवाही के चलते बताया है कि जयप्रकाश पुत्र पान सिंह के साथ 02-03-2026 की रात मोहल्ले व फैक्ट्री क्वार्टर के लड़को द्वारा गोली मारने की घटना की गयी थी। जिसमे प्रार्थी को पुलिस द्वारा संभल जिला अस्पताल रेफर किया गया था । जिसकी स्लिप साथ में सल्लगन है। प्रार्थी के हाथ में गोली लगी होने पर जिला अस्पताल के डॉक्टर ने प्रार्थी के हाथ से गोली निकाल दी है यह कह कर प्रार्थी को वहां से डिस्चार्ज कर दिया गया । प्रार्थी द्वारा डॉक्टर से निकली हुई गोली को दिखाने पर डॉक्टर ने साफ मना कर दिया और कहाँ हम निकली हुए गोली दिखाते नहीं है । परन्तु प्रार्थी को कल रात हाथ में काफी असहनीय दर्द हुआ तो प्रार्थी ने अगले दिन एक्सरे कराया तो प्रार्थी दंग रह गया एक्सरे में गोली साफ़ दिख रही है ।जिससे प्रर्तित होता की प्रार्थी के हाथ से गोली निकाली ही नहीं थी। जिलाधिकारी संभल से अनुरोध है कि डाक्टर के खिलाफ कार्यवाही करें भविष्य में ऐसी घटना प्रार्थी के साथ हुई है किसी और के साथ नहीं ना हो। चर्चा बनी हुई है कि यह एक बहुत ही गंभीर चिकित्सा लापरवाही (Medical Negligence) का मामला है, जहां प्रारंभिक जांच में गोली का पता नहीं चला और बाद में निजी एक्सरे (X-ray) में इसकी पुष्टि हुई। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों या रेडियोलॉजिस्ट की ओर से बड़ी चूक हो सकती है, जो मरीज की जान के लिए खतरा बन सकता था ।

