Mayawati ने सपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वह कांशीराम जयंती को ‘पीडीए दिवस’ के रूप में मनाने जा रही है, जो केवल नौटंकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से दलित-पिछड़ा विरोधी रहा है। मायावती ने याद दिलाया कि सपा शासनकाल में ही कांशीराम का निधन हुआ था, लेकिन उस दिन कोई भी राजकीय शोक घोषित नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि सपा शासन में दलित महानायकों के नाम पर बने जिलों और प्रतिष्ठानों के नाम बदल दिए गए। इससे भाजपा को फायदा हुआ। मायावती ने 2 जून 1995 के लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उन पर जानलेवा हमला हुआ था। इसके अलावा, उन्होंने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का उदाहरण दिया और कहा कि सपा शासन के दौरान हुई यह हिंसा भी भाजपा के राजनीतिक लाभ में काम आई।
मायावती ने सपा को जातिवादी और सांप्रदायिक राजनीति करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी न केवल दलित विरोधी है बल्कि मुस्लिम विरोधी भी रही है। उन्होंने सपा के शासनकाल को याद करते हुए बताया कि कैसे उनकी नीतियों और कार्यवाहियों ने समाज के कमजोर वर्गों को नुकसान पहुंचाया। मायावती का कहना था कि सपा की चाल और नीतियां हमेशा भाजपा को राजनीतिक लाभ पहुंचाती रही हैं। उनका यह बयान कांशीराम जयंती के अवसर पर सपा की योजनाओं के विरोध में आया।

