प्रभादेवी नानी, अहमदाबाद की 98 वर्षीय महिला, इस बात का उदाहरण हैं कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। शादी के बाद उन्होंने छह दशकों तक परिवार संभालते हुए खाना बनाने का शौक बनाए रखा और अक्सर पड़ोसियों को भोजन भेजती रहीं।
2017 में पति के निधन के बाद उनका जीवन शांत हो गया, लेकिन एक छोटे से ऑर्डर ने उनकी जिंदगी बदल दी। बेटी की सहेली ने उनसे गुजराती डिश खांडवी बनाने का अनुरोध किया, जिसके बदले उन्हें पैसे मिले। यहीं से 2018 में ‘नानी का नाश्ता’ नाम से उनका फूड बिजनेस शुरू हुआ। आज वे 200 से अधिक परिवारों को नियमित नाश्ता और भोजन उपलब्ध कराती हैं। खास बात यह है कि 98 साल की उम्र में भी वे खुद हर ऑर्डर की गुणवत्ता जांचती और खाना चखती हैं। उनका संदेश है कि कभी भी नए सिरे से शुरुआत करने में देर नहीं होती और जुनून जीवन को नई दिशा दे सकता है।
‘नानी का नाश्ता’ की प्रेरक कहानी, जुनून ने बदली जिंदगी
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