प्रदेश में 3.37 करोड़ से अधिक खुराक लगाने का लक्ष्य…
गो-आश्रय स्थलों पर हरे चारे, भूसे, स्वच्छ पेयजल एवं वर्षाकालीन व्यवस्थाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश…
दुग्ध समितियों के गठन में तेजी लाकर अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादकों को संगठित दुग्ध क्षेत्र से जोड़ा जाए…
प्रदेश में खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) की प्रभावी रोकथाम के लिए आगामी टीकाकरण अभियान को पूरी गंभीरता एवं प्रतिबद्धता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए हैं। एफएमडी टीकाकरण आगामी 22 जुलाई से 8 सितम्बर, 2026 तक संचालित किया जाएगा, जिसके अंतर्गत प्रदेश में 3,37,80,404 खुराक लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रत्येक टीकाकरण का विवरण भारत पशुधन एप पर रियल टाइम अपलोड किया जाए।
आज विधान सभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि टीकाकरण अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जनपद स्तर पर माइक्रोप्लान तैयार कर टीकाकरण दलों का चिह्नांकन एवं प्रशिक्षण समय से पूर्ण किया जाए। वैक्सीन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए निर्धारित 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान के अनुरूप भंडारण एवं परिवहन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही वैक्सीन, सिरिंज, नीडिल, ईयर टैग एवं पीपीई किट सहित सभी आवश्यक सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
अभियान की दैनिक प्रगति की मुख्यालय स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए तथा फील्ड स्तर पर आने वाली समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए। टीकाकरण, कोल्ड चेन प्रबंधन और वैक्सीन की गुणवत्ता में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते संरक्षित निराश्रित गोवंश के समुचित भरण-पोषण, हरे चारे, भूसे, स्वच्छ पेयजल तथा वर्षाकाल के दृष्टिगत सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वर्षा के दौरान गो-आश्रय स्थलों पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो और जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। संरक्षित गोवंश की देखभाल एवं स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाए तथा उनके संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर शिथिलता न बरती जाए। हरे चारे की पर्याप्त बुआई की जाए। कृत्रिम गर्भधान कार्यों में और तेज़ी लाये जाए। लघु पशु योजनाओं का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए।
दुग्ध विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए बरेली, मुरादाबाद एवं मेरठ मंडलों में दुग्ध समितियों के गठन की प्रगति में तेजी लाने के निर्देश दिए। ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध समितियों का सुदृढ़ नेटवर्क विकसित करते हुए अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादकों एवं पशुपालकों को संगठित दुग्ध क्षेत्र से जोड़ा जाए, जिससे उन्हें उनके उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त हो और उनकी आय में वृद्धि हो सके। जिन क्षेत्रों में दुग्ध समितियों के गठन की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, वहां विशेष प्रयास करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए। दुग्ध समितियों के गठन एवं विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा और प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादकों एवं पशुपालकों तक पहुंच सके। किसानों का दुग्ध मूल्य भुगतान समय पर किया जाए।
पशुपालकों एवं दुग्ध उत्पादकों के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए विभागीय योजनाओं का प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध रूप से पहुंचाने के साथ ही उनकी प्रगति की नियमित निगरानी भी की जाए।
एफएमडी टीकाकरण, गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं, कृत्रिम गर्भाधान तथा दुग्ध समितियों के गठन सहित सभी प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों की नियमित एवं प्रभावी मॉनिटरिंग की जाए और निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए।

