कर्नाटक के कनकपुरा के 70 वर्षीय रामचंद्र पिछले 56 सालों से अपनी छोटी-सी दुकान ‘कोटे माने इडली’ चला रहे हैं। उन्होंने 16 साल की उम्र में अपने पिता का काम संभाला और आज भी हर सुबह 4 बजे उठकर खुद बैटर तैयार करते हैं और पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे पर इडली बनाते हैं।
उनकी दुकान पर रोज़ ग्राहकों की लंबी लाइन लगती है। वे हर दिन लगभग 1,500 इडली बेचते हैं और आज भी एक इडली की कीमत सिर्फ ₹5 रखते हैं। उनकी स्वादिष्ट रेसिपी और सालों से कायम गुणवत्ता ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है।
रामचंद्र कहते हैं, “अगर मैं काम छोड़ दूँ, तो मेरा वजूद ही खत्म हो जाएगा।” यही जुनून और मेहनत उन्हें आज भी हर दिन काम करने की प्रेरणा देता है।
सीख: बड़ा बिजनेस शुरू करने से नहीं, बल्कि छोटे काम को ईमानदारी, गुणवत्ता और लगातार मेहनत से करने से बड़ी सफलता मिलती है।
70 साल की उम्र में भी जुनून बरकरार, रोज बेचते हैं 1500 इडली
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