इस किताब को देहरादून के पत्रकार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने अपने लिए मंगाया था। मेरी नज़र पड़ी तो मैंने उनसे माँग लिया। देहरादून सपरिवार आया हुआ हूँ। उत्तराखंड घूमने। यहाँ एक दो मीटिंग निपटा कर भवाली / रामगढ़ / मुक्तेश्वर जाना है। मुक्तेश्वर में नवभारत टाइम्स से रिजाइन कर चुके पत्रकार राहुल पांडेय जी अपना ठिकाना बना चुके हैं। वे वहीं बस गए हैं। उनके साहसिक फैसले की तारीफ़ करता हूँ मैं। देहरादून में अगले दो दिन तक हूँ, फिर आगे निकलेंगे।
इस किताब को सरसरी तौर पर पलटते पढ़ते लगा, ऐसी ही कोई किताब आजकल की अपनी मनःस्थिति में तलाश रहा था। किताब 2024 में ही आई है। बहुत गहरी बातों-अनुभवों से पूर्ण है। प्रकाशक कोई मोतीलाल बनारसीदास हैं। संन्यास अध्यात्म में रुचि रखने वाले गृहस्थों के लिए मस्ट रीड है ये!

