अयोध्या राम मंदिर में भारी संख्या में भक्त पहुंचते हैं. यहां पर वे श्रद्धानुसार दान पेटी में पैसा डालते हैं. लेकिन वहीं पर बैठे कुछ जिम्मेदार लोग उनकी आस्था और भरोसे के साथ खिलवाड़ करते रहे.
वे चढ़ावे के पैसे में से चोरी करते और उन पैसों से अपने शौक पूरे करते. आरोपों के मुताबिक, इसमें राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ही कुछ लोग शामिल हैं. उनके खिलाफ FIR भी दर्ज हो चुकी है और आज की तारीख में वे सलाखों के पीछे हैं. कब से चल रहा था ये खेल और कैसे हुआ इसका खुलासा, आइए जानते हैं.
मई महीने के आखिरी सप्ताह में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियो ने बैंक में जमा हो रही रकम का ब्यौरा देखा और रोजाना दान पेटियों के खाली होने के क्रम की पड़ताल की तो सबसे चोरी का शक पैदा हुआ. दरअसल, एक दान पेटी में 6 से 7 लाख रुपए एक बार में जमा होते थे. लेकिन कुछ सप्ताह के क्रम में 500 की गड्डी में कमी देखी गई. इसके बाद शक गहराया तो नोट गिनने वाले कमरे में कुछ हिडन कैमरे लगवाए गए.
इन हिडन कैमरे की एक सप्ताह की फुटेज देखी गई तो पता चला नोट गिनने की प्रक्रिया में लगे कर्मचारी सामने दिख रहे सीसीटीवी के सामने खड़े हो जाते और दूसरा साथी बनाए गए नोटों की गड्डी में नोट चोरी कर कपड़ों में छुपा लेते हैं.
बाथरूम में छिपाते थे चोरी के नोटों की गड्डियां
रकम पार करने के बाद अनुकल्प मिश्रा और अन्य आरोपी नोटों की गड्डियों को बाथरूम छिपा देते थे. बाद में मौका पाकर इसे मंदिर के बाहर ले जाते थे. फिर एक मकान में बंटवारा होता था. यह खेल दो से तीन साल से चल रहा था.
लेकिन हिडन कैमरे में उनकी यह चोरी पकड़ी गई
मिली जानकारी के अनुसार यह चोरी एक और तरह से हो रही थी. नोट गिनने वाले कर्मचारी हर गड्डी में एक्स्ट्रा नोट जमा कर देते. जब बैंक के पास रकम गिनने की बारी आती तो हर गड्डी के एक एक नोट को गिनने के बजाए सिर्फ गड्डी गिनी जाती और उसका वाउचर बन जाता.
जब यह रकम बैंक में जमा करने के लिए मंदिर से बैंक में ले जाई जाती उस दौरान हर गड्डी में जो एक्स्ट्रा नोट लगाए गए थे वह निकाल दिए जाते. इस तरह वाउचर से रकम का मिलान भी हो जाता और रकम चोरी भी हो रही थी. अनुकल्प मिश्रा चढ़ावे के वाउचर बनाने की प्रक्रिया से जुड़ा था और वह यही हेरा फेरी अपने बहनोई लव कुश मिश्रा के जरिए कर रहा था.

