सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। यह देखते हुए कि किसी पुलिस अधिकारी के लिए ऐसा करना वैध है, मात्र इसलिए गिरफ्तारी नहीं की जा सकती।जांच एजेंसी को किसी आरोपी को पूछताछ के लिए हिरासत में नहीं लेना चाहिए और ऐसा तभी किया जाना चाहिए जब जांच के लिए यह जरूरी हो। सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ गिरफ्तारी से जुड़ी भारतीय नागरिक संहिता ( BNSS ), 2023 की कई धाराओं की व्याख्या कर दी है। पूरा मामला समझते हैं।
लाइवा लॉ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता(BNSS), 2023 की विभिन्न धाराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सात वर्ष तक के कारावास से जुड़े दंडनीय अपराधों के संबंध में किसी आरोपी या संबंधित व्यक्ति को कानून की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करना नियम है।

