मुंबई के बांद्रा स्थित कार्टर रोड पर समुद्र के सामने बना ‘आशीर्वाद’ बंगला राजेश खन्ना के स्टारडम की सबसे बड़ी निशानियों में गिना जाता था। यह संपत्ति मूल रूप से अभिनेता राजेंद्र कुमार से जुड़ी थी। रिपोर्टों के अनुसार, राजेंद्र कुमार ने इसे अपने शुरुआती संघर्ष के दौर में खरीदा था और इसका नाम ‘डिंपल’ रखा था। बाद में उन्होंने राजेश खन्ना को यह बंगला बेचते समय उनसे नाम बदलने का अनुरोध किया, क्योंकि ‘डिंपल’ उनकी बेटी का नाम था। राजेंद्र कुमार के आशीर्वाद के बाद राजेश खन्ना ने इसका नाम ‘आशीर्वाद’ रख दिया।
राजेश खन्ना के लिए यह सिर्फ एक आलीशान घर नहीं था। उनके करियर के सबसे शानदार दौर का यह महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। उन्होंने यहां अपनी जिंदगी के कई अहम वर्ष बिताए और बाद में इच्छा जताई थी कि उनकी मृत्यु के बाद इस बंगले को संग्रहालय में बदल दिया जाए, ताकि उनकी फिल्मों और यादों को वहां सुरक्षित रखा जा सके।
सलमान खान से जुड़ा किस्सा राजेश खन्ना के जीवन के मुश्किल दौर का है। रिपोर्टों के मुताबिक, जब खन्ना आर्थिक परेशानियों से गुजर रहे थे और बंगले को लेकर वित्तीय दबाव की स्थिति बनी, तब सलमान खान ने मदद करने की पेशकश की थी। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि सलमान इस संपत्ति को खरीदने में रुचि रखते थे। इस बात से राजेश खन्ना कथित तौर पर बेहद आहत हुए और उन्हें लगा कि उनके बेहद करीबी समझे जाने वाले लोगों की ओर से उनके घर को लेकर ऐसी पेशकश उनके लिए भावनात्मक रूप से चोट पहुंचाने वाली थी।
हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि “सलमान खान ने नीलामी में बोली लगाई और राजेश खन्ना बुरी तरह भड़क गए” जैसी भाषा मीडिया की अलग-अलग रिपोर्टों में अलग अंदाज से सामने आती है। ज्यादा सुरक्षित और तथ्यपरक निष्कर्ष यही है कि सलमान की ओर से बंगले को लेकर खरीद/मदद की पेशकश की बात रिपोर्ट की गई थी, लेकिन इसे किसी आधिकारिक सार्वजनिक नीलामी का मामला कहना उचित नहीं है।
राजेश खन्ना का निधन 18 जुलाई 2012 को हुआ। उनके संग्रहालय बनाने के सपने के बावजूद बाद में ‘आशीर्वाद’ को लगभग ₹90 करोड़ में बेचे जाने की रिपोर्ट सामने आई और समय के साथ वह ऐतिहासिक बंगला ध्वस्त कर दिया गया।
इस कहानी की सबसे भावुक बात यही है कि ‘आशीर्वाद’ राजेश खन्ना के लिए सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि उनके संघर्ष से सुपरस्टार बनने तक के सफर का प्रतीक था। इसलिए उसके भविष्य को लेकर उनकी भावनाएं बेहद गहरी थीं। आज बंगला भले ही मौजूद नहीं है, लेकिन हिंदी सिनेमा के इतिहास में ‘आशीर्वाद’ और राजेश खन्ना का नाम हमेशा साथ लिया जाएगा।

