भारतीय मानव कल्याण समिति के प्रबन्धक डॉ. टी.एस. पाल ने सीता आश्रम स्थित प्राचीन मूछों वाले महादेव मंदिर में सपरिवार किया जलाभिषेक ।उन्होंने कहा श्रावण मास हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र, पुण्यदायी और आध्यात्मिक महत्व वाला महीना है। यह मास भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष रूप से समर्पित माना जाता है। वर्षा ऋतु के इस सुंदर समय में प्रकृति हरियाली की चादर ओढ़ लेती है और वातावरण भक्ति, श्रद्धा तथा उल्लास से भर जाता है।सावन के प्रत्येक सोमवार का व्रत विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करते हैं और शिव-पार्वती की आराधना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से किया गया व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा मनोवांछित फल प्रदान करता है। समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल (विष) को भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। इसी कारण उन्हें नीलकंठ कहा जाता है। उनकी इस महान करुणा और त्याग की स्मृति में सावन माह में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं तथा उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं।सावन मास का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंदिरों में भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है, जिससे समाज में एकता, सद्भाव और भक्ति की भावना मजबूत होती है।यह महीना हमें संयम, सेवा, दान, करुणा, प्रकृति संरक्षण और आध्यात्मिक जीवन का संदेश देता है। सावन की हरियाली हमें पर्यावरण के महत्व का भी स्मरण कराती है और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती है।पवित्र सावन मास केवल पूजा-अर्चना का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सदाचार, ईश्वर के प्रति समर्पण और मानवता की सेवा का भी श्रेष्ठ अवसर है। यदि हम इस माह में सच्ची श्रद्धा, भक्ति और अच्छे कर्मों का पालन करें, तो हमारा जीवन सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर सकता है।

