रिपोर्ट-अलतमश सिददीकी,,
बरेली में समाजवादी पार्टी संगठन के भीतर लंबे समय से चला आ रहा असंतोष आखिरकार सामने आ ही गया। पार्टी हाईकमान ने जिलाध्यक्ष शिवचरण कश्यप को उनके पद से हटाते हुए जिला कमेटी को भंग कर दिया है। यह फैसला सोमवार देर शाम लिया गया, जिसके बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई। पार्टी सूत्रों की मानें तो यह कार्रवाई अचानक नहीं, लंबे समय से सुलग रही नाराजगी और लगातार मिल रही शिकायतों का नतीजा है।बताया जा रहा है कि शिवचरण कश्यप के खिलाफ गुटबाजी को बढ़ावा देने, संगठनात्मक बैठकों में लापरवाही, कार्यकर्ताओं की अनदेखी और चुनावी तैयारियों में ढिलाई जैसी कई शिकायतें लगातार प्रदेश नेतृत्व तक पहुंच रही थीं। जिला संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और फ्रंटल संगठनों के नेता भी भीतरखाने अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके थे। इसके बावजूद लंबे समय तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे असंतोष और गहराता चला गया।सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में पार्टी के कुछ अहम कार्यक्रमों में अपेक्षित भीड़ न जुट पाने और जमीनी स्तर पर संगठन की सक्रियता कमजोर पड़ने की रिपोर्ट ने हाईकमान को सख्त फैसला लेने पर मजबूर किया। कहा जा रहा है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए पार्टी अब किसी भी तरह की ढिलाई या अंदरूनी कलह को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।जिला कमेटी भंग किए जाने के बाद फिलहाल संगठनात्मक जिम्मेदारी अस्थायी रूप से प्रदेश स्तर से देखी जाएगी। जल्द ही बरेली में नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति और नई जिला कमेटी के गठन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। माना जा रहा है कि इस बार हाईकमान ऐसे चेहरे को जिम्मेदारी दे सकता है जो सभी गुटों को साथ लेकर चल सके और संगठन को नए सिरे से मजबूत कर सके।शिवचरण कश्यप को हटाए जाने के बाद जिले के सपा कार्यकर्ताओं में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे देर से लिया गया लेकिन जरूरी कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे आंतरिक राजनीति का परिणाम मान रहे हैं। कुल मिलाकर, लंबे समय से सुलग रही असंतोष की चिंगारी अब खुलकर सामने आ चुकी है और सपा नेतृत्व ने संगठन को नए सिरे से खड़ा करने का संकेत दे दिया है।

