-चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और 112 के समन्वय से त्वरित हुआ रेस्क्यू, काउंसलिंग के जरिए परिवारों को किया जा रहा जागरूक, आर्थिक तंगी होने पर योजनाओं से जुड़ रहीं बच्चियां
-सरकारी योजनाओं से स्कूलों में बच्चियों की उपस्थिति में आया भारी उछाल, बाल सेवा योजना में मिल रहे 4000 रुपये, वहीं सुमंगला में जन्म से स्नातक तक मिल रहे 25,000 रुपये
मुरादाबाद, 10 जुलाई। बेटियों को सशक्त बनाने और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को जड़ से खत्म करने में उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाएं मुरादाबाद में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना और चाइल्ड हेल्पलाइन की सक्रियता से जिले में न सिर्फ बेटियों के जन्म का जश्न मनाया जा रहा है, बल्कि स्कूलों में उनकी उपस्थिति का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और पुलिस हेल्पलाइन 112 के एकीकरण का ही परिणाम है कि जिले में सितंबर 2023 से अब तक 45 बाल विवाह रुकवाए जा चुके हैं।
वहीं, कन्या सुमंगला योजना के तहत अप्रैल 2019 से अब तक 32,300 से अधिक बेटियों को लाभान्वित कर जिले ने शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने की ओर मजबूती से कदम बढ़ा दिए हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले ने 10,200 बेटियों के लक्ष्य के सापेक्ष 99.9 प्रतिशत से अधिक की उपलब्धि हासिल कर ली है।
सूचना मिलते ही रेस्क्यू कर होती है काउंसलिंग
बाल विवाह की रोकथाम में जिला बाल संरक्षण ईकाई (डीसीपीयू) व चाइल्ड हेल्पलाइन की भूमिका बेहद अहम हो गई है। डीसीपीयू की संरक्षण अधिकारी शिवांगी शर्मा व चाइल्ड हेल्पलाइन की प्रभारी तबस्सुम बताती हैं कि बाल विवाह होने की जानकारी मिलने पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी), जिला बाल संरक्षण ईकाई समेत पुलिस की टीम फौरन मौके पर जाती है और बच्ची का सुरक्षित रेस्क्यू करती है। इसके बाद बच्ची और उसके माता-पिता को चाइल्ड हेल्पलाइन सेंटर लाकर उनकी सघन काउंसलिंग की जाती है। अभिभावकों को समझाया जाता है कि बच्ची अभी नाबालिग है और यह उम्र उसकी पढ़ाई की है। यदि परिवार बच्ची को पढ़ाने में आर्थिक रूप से असमर्थ होता है, तो उसे मुख्यमंत्री द्वारा चलाई जा रही कन्या सुमंगला व बाल सेवा जैसी योजनाओं का लाभ दिलाया जाता है ताकि उसकी शिक्षा में कोई बाधा न आए और परिवार पर आर्थिक बोझ न पड़े। साथ ही उन बच्चियों की डीसीपीयू द्वारा समय-समय पर मॉनिटरिंग भी की जाती है।
स्कूलों में बढ़ी बेटियों की उपस्थिति
योजनाओं के शैक्षिक प्रभाव पर जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) रितु तोमर बताती हैं कि मुख्यमंत्री द्वारा चलाई जा रही कन्या सुमंगला व अन्य योजनाओं का लाभ हर गरीब बच्ची तक पहुंच रहा है। इन योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता बेटियों की पढ़ाई में बेहद काम आ रही है। विभाग का मुख्य उद्देश्य हर गरीब बच्ची को इन योजनाओं से जोड़कर उन्हें पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित करना है। महिला कल्याण की इन योजनाओं के चलते विद्यालयों में बच्चियों की उपस्थिति में बड़े स्तर पर उछाल देखने को मिला है और बच्चियों के बीच स्कूल छोड़ने (ड्रॉपआउट) की प्रवृत्ति काफी कम हुई है।
सपनों को मिली उड़ान, लाभार्थियों की जुबानी
केस-1 ः लाभार्थी राधेश्याम ने बताया कि मेरी बेटी शिवन्या अभी पहली कक्षा में गई है और कन्या सुमंगला योजना के तहत हमें 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिली है। इससे पहले मुझे उसकी पढ़ाई को लेकर हमेशा चिंता लगी रहती थी, लेकिन अब यह चिंता काफी कम हो गई है। अगर सरकार इसी तरह मदद करती रही, तो मैं अपनी बेटी को अच्छी शिक्षा देकर उसे एक सरकारी शिक्षिका बना सकूंगा। इस योजना से बेटी की जल्दी शादी करने का सामाजिक दबाव भी काफी हद तक कम हुआ है।
केस-2ः लाभार्थी विष्णु दत्त त्यागी ने बताया कि मेरी बेटी परी आरआरएस पब्लिक स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ रही है। छठी कक्षा में उसे 92 प्रतिशत अंक मिले थे और कन्या सुमंगला योजना के तहत उसे 3,000 रुपये की मदद मिली। इस सहायता से उसकी किताबें खरीदने और स्कूल की फीस भरने में बहुत मदद मिली है। हम आर्थिक रूप से कमजोर हैं, लेकिन इस योजना की वजह से मुझे अब परी की पढ़ाई रुकने का डर नहीं है। वह बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती है और सरकार की इस मदद से उसके सपने पूरे होने की उम्मीद है।
केस-3ः लाभार्थी चांदनी के बेटी राधिका शर्मा ने बताया कि मैं अभी बीए (स्नातक) की पढ़ाई कर रही हूँ। मेरे पिता सब्जी का ठेला लगाते हैं, इसलिए घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि मेरी पढ़ाई का खर्च आसानी से उठाया जा सके। कन्या सुमंगला योजना के तहत मुझे 7,000 रुपये की एकमुश्त सहायता मिली, जिसने मेरी पढ़ाई को रुकने से बचाया। अब मैं बिना किसी आर्थिक तनाव के अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे पा रही हूँ। मेरा सपना एक बैंक अधिकारी बनने का है, और इस योजना से मुझे यह उम्मीद मिली है कि मैं अपना लक्ष्य जरूर हासिल कर पाऊंगी।
केस-4ः लाभार्थी सुहानी ने बताया कि घर की माली हालत ठीक न होने के कारण हमेशा यही डर लगा रहता था कि कहीं बेटी सुहानी शर्मा की पढ़ाई बीच में ही न रोकनी पड़े। समाज की तरफ से भी जल्दी शादी करने का दबाव महसूस होता था। लेकिन जब से हमें ‘कन्या सुमंगला योजना’ के तहत मदद मिलनी शुरू हुई है, हमारी सबसे बड़ी चिंता खत्म हो गई है। बेटी को 9वीं की पढ़ाई के लिए 5 हजार रुपये मिले थे। अब इसी पैसे से सुहानी की स्कूल फीस और किताबों का खर्च आसानी से निकल जाता है। अब हमारा पूरा ध्यान बेटी को खूब पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाने पर है, ताकि वह अपने पैरों पर खड़ी हो सके।
कन्या सुमंगला में 25 हजार तो बाल सेवा मिलते है 4 हजार रुपये*
कन्या सुमंगला योजना के तहत सरकार बेटी के जन्म से लेकर उसकी उच्च शिक्षा तक कुल 25,000 रुपये की आर्थिक सहायता छह अलग-अलग चरणों में दे रही है। जन्म के समय 5000, टीकाकरण पर 2000, पहली कक्षा में दाखिले पर 3000, छठी कक्षा में 3000, नवीं कक्षा में 5000 और 10वीं या 12वीं के बाद डिग्री या डिप्लोमा में प्रवेश पर 7000 रुपये सीधे खाते में भेजे जाते हैं। इसके अलावा ऐसे बच्चे जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है, उनके लिए उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना संचालित है। इसमें बच्चों की शिक्षा और पालन-पोषण के लिए 4000 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं, ताकि बेसहारा बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित रहे। अभी तक इस योजना के माध्यम से जिले के 875 बच्चों को लाभ मिल चुका है।
वर्जन
“कन्या सुमंगला और बाल सेवा जैसी योजनाएं बाल विवाह रोकने और बेटियों को सशक्त बनाने में बेहद कारगर साबित हो रही हैं। मुरादाबाद जिले में अप्रैल 2019 से अब तक 32,300 से अधिक बेटियों को कन्या सुमंगला योजना से जोड़ा जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए हमें 10,200 बेटियों का लक्ष्य मिला था, जिसके सापेक्ष हमने 99.9 प्रतिशत से अधिक की उपलब्धि हासिल कर ली है। वहीं बाल सेवा योजना के माध्यम से भी तक 875 बच्चों को लाभ दिया जा चुका है। हमारी टास्क फोर्स लगातार काम कर रही है ताकि कोई भी पात्र बच्ची इस योजना से वंचित न रहे और किसी भी बच्ची का बाल विवाह न हो।”
– मोनिका राणा, जिला प्रोबेशन अधिकारी, मुरादाबाद
“बाल विवाह रोकने के लिए जिला स्तर पर बनी टास्क फोर्स पूरी तरह मुस्तैद है। रेस्क्यू की गई बच्चियों की काउंसलिंग के बाद उनके पुनर्वास की उचित व्यवस्था की जाती है। अगर कोई बच्ची बेसहारा है या उसके माता-पिता नहीं हैं, तो उसे तत्काल ‘उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ के तहत 4000 रुपये प्रतिमाह की स्पॉन्सरशिप से जोड़ा जाता है। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि आर्थिक तंगी या सामाजिक दबाव के कारण किसी भी बच्ची का बचपन न छिने और वे सुरक्षित माहौल में अपने सपनों को पूरा कर सकें।”
– शिवांगी शर्मा, संरक्षण अधिकारी, जिला बाल संरक्षण ईकाई, मुरादाबाद
“प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ और महिला कल्याण की अन्य योजनाओं का सीधा लाभ गरीब बच्चियों तक पहुंच रहा है। इन योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता बेटियों की पढ़ाई में बहुत मददगार साबित हो रही है। सरकार की इन महिला-केंद्रित योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव के चलते ही आज विद्यालयों में बच्चियों की उपस्थिति (अटेंडेंस) में हर वर्ष बड़े स्तर पर उछाल देखने को मिला है और स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं की संख्या घटी है।”
– रितु तोमर, जिला विद्यालय निरीक्षक, मुरादाबाद

