एक, जब बिहार की गलियों में कीचड़ से सने कपड़ों के साथ संघर्ष कर रहे थे।
दूसरा, जब जीत के रंगों में रंगे दिखाई दे रहे हैं।
लंबा संघर्ष, आलोचनाएं और असफलताएं आईं, लेकिन उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा।
संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता – एक दिन वही सपना बनकर हकीकत से टकराता है।

