राम मंदिर के चढ़ावा चोरी केस को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अगर चंपत राय चाहते तो ये चोरी जून में नहीं बल्कि 6 महीने पहले जनवरी में ही रुक जाती। दरअसल, ट्रस्ट के लोगों को जनवरी में ही चढ़ावे में चोरी का शक हो गया था क्योंकि पिछले साल के आखिर में अचानक चढ़ावे की रकम में काफी गिरावट आ गई थी। असल में हर महीने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) राम मंदिर ट्रस्ट के खातों का ऑडिट करता है। इसी CA ने ट्रस्ट के मेंबर्स को जानकारी दी कि राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में अचानक काफी गिरावट आ रही है। चढ़ावे के वाउचर और रसीदों में कोई तालमेल नहीं है। पांच लाख से ऊपर के खर्च का हिसाब नहीं मिल रहा है। CA के बताने के बाद ट्रस्ट की तरफ से महासचिव चंपत राय को चिट्टी लिखी गई। चंपत राय को सुझाव दिया गया कि वो पूरे खातों की ठीक से जांच कराएं। चढ़ावे की देख-रेख के लिए तुरंत ही एक डिपार्टमेंट हेड अपॉइंट करें। चंपत राय से कहा गया कि चढ़ावे में जो फॉरेन करेंसी आ रही है, उसकी ठीक से एंट्री नहीं हो रही है। फॉरेन करेंसी के हिसाब किताब के लिए भी, अलग से एक आदमी रखा जाए। गिनती करने वाले स्टाफ के ड्रेस कोड और फ्रिस्किंग को लेकर जो SOP बनाए गए हैं, उनका सख्ती से पालन हो। चंपत राय से ये भी कहा गया कि मंदिर के काम के लिए जो ठेके मनमर्ज़ी से दिए जा रहे हैं, वो ठीक नहीं हैं। प्रॉपर टेंडर निकाला जाए, कोटेशन मंगाया जाए लेकिन, ये चिट्ठी मिलने के बाद चंपत राय बुरा मान गए। उन्होंने सुधार करने की जगह, नया हेड अपॉइंट करने की जगह शिकायत शुरू कर दी। नतीजा ये हुआ कि कोई सिस्टम बना नहीं, किसी आदमी का अपॉइंटमेंट नहीं हुआ।

