27 साल बाद 15 जून को सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयो अमृत व सर्वार्थ सिद्धि योग में करें पितरों का तर्पण आचार्य ऋतुपर्ण चंदौसी- 15 जून को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विशेष मानी जा रही है। 27 वर्ष बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है कि जब अधिकमास में सोमवती अमावस्या अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग के प्रभाव में आएगी। इस दिन स्नान, दान, जप, तप और पितृ तर्पण का विशेष महत्व रहेगा। इससे पहले यह संयोग वर्ष 1999 में बना था। श्रीमद् भागवत कथा प्रवक्ता आचार्य ऋतुपर्ण शर्मा ने बताया शास्त्रों के अनुसार हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या को भगवान शिव की आराधना और पितरों के तर्पण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। जब अमावस्या सोमवार को पड़ती है तो उसका महत्व कई गुणा बढ़ जाता है।इस दिन सुबह पवित्र नदी, सरोवर अथवा घर पर गंगाजल मिश्रित जल से स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक करना चाहिए। इसके साथ ही पीपल वृक्ष की पूजा, परिक्रमा और दीपदान करने से शुभ फल प्राप्त होता है। विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पूजा-अर्चना करती हैं। आचार्य ऋतुपर्ण ने सोमवती अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि
अमावस्या और सोमवार (जो भगवान शिव को समर्पित है) का संयोग सोमवती अमावस्या के महत्व को और भी बढ़ा देता है। सोमवार को भगवान शिव की पूजा का सबसे पवित्र दिन माना जाता है और इस दिन भक्त शांति, समृद्धि और बाधाओं के निवारण के लिए प्रार्थना करते हैं । अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन अन्न, वस्त्र, फल, जल, छाता तथा जरूरतमंदों को उपयोगी सामग्री का दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। वहीं पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करने से पितृ दोषों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।श्रद्धालु इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दुर्लभ संयोग में किए गए शुभ कार्यों का पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए श्रद्धालुओं को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए।

