बदायूं में सांसद धर्मेंद्र यादव ने बड़ी संभावनाओं के साथ राजकीय मेडिकल कॉलेज खुलवाया था, उन्होंने पूर्व मंत्री विमल कृष्ण अग्रवाल और तमाम किसानों से व्यक्तिगत वार्ता कर सहयोग मांगा था, जिससे कॉलेज बन पाया लेकिन, बनने के बाद कॉलेज के अपेक्षित परिणाम आज तक नहीं आ पाये हैं, क्योंकि अधिकांश नियुक्तियां राजनैतिक दबाव में की गई थीं, सिफारिश से लगे लोगों को काम आता नहीं था और जिन्हें आता था, वे दबंगई में ड्यूटी नहीं करते थे, जिससे कॉलेज सफेद हाथी बन गया, भाजपा नेता लापरवाहों को चिन्हित कर आउट नहीं करा पाये, लापरवाह आज तक वेतन हड़प रहे हैं, इसीलिये आज भी लोगों को इलाज के लिये बरेली, अलीगढ़, लखनऊ और दिल्ली भागना पड़ रहा है, इसको लेकर कोई गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है, विवाद आज तक बरकार हैं, नाक, कान एवं नेत्र विभाग की नर्सिंग सिस्टर इंचार्ज पूनम त्रिवेदी ने हत्या तक की आशंका जताई है, उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुये डीएम, एसएसपी, प्रधानाचार्य और डीजीएम से शिकायत की है…

