सीएम योगी आदित्यनाथ का निजी अस्पताल के उद्घाटन का कार्यक्रम अचानक ही रैली में बदल गया। पहले यहां केवल अस्पताल के उद्घाटन का ही कार्यक्रम था। तीन दिन पहले ही इसे रैली के रूप में करने के निर्देश दिए गए और पुलिस-प्रशासन इसे अमलीजामा पहनाने में जुटा। उसके बाद मीडियाकर्मियों को बुलाने का समय बदला गया। साथ ही बीजेपी के नेताओं को भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी दी गई।
माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले यूपी विधानसभा चुनावों के लिए जमीन को मजबूत करने की रणनीति के तहत ऐसा किया गया, जिसमें जनता के बीच मेसेज देने का कोई मौका पार्टी और सीएम नहीं छोड़ना चाहते हैं। आयोजकों का पहले छोटे स्तर पर उद्घाटन समारोह करने का प्लान था।
मीडिया को शाम साढ़े चार बजे का आमंत्रण पत्र अस्पताल प्रबंधन की ओर से भेजा गया।होली से एक दिन पहले अचानक से इसे रैली करने का संदेश मिला। जिला प्रशासन के सूचना विभाग ने मीडियाकर्मियों को रैली के लिए दोपहर में आमंत्रित किया। लोगों के बैठने से लेकर पार्किंग तक के बंदोबस्त किए गए। यहां रैली से विकास का संदेश दिया गया। इसमें बताया गया कि सरकार ने कैसे प्रदेश की तस्वीर बदली है।

