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अमर केसरी हिंदी दैनिक न्यूज़ > राज्य > उत्तर प्रदेश > रामगंगा में 555 कछुयें छोड़ संरक्षण का दिलाया संकल्प
उत्तर प्रदेशराज्य

रामगंगा में 555 कछुयें छोड़ संरक्षण का दिलाया संकल्प

Amarkesadmin
Last updated: January 14, 2026 12:45 pm
Amarkesadmin
7 months ago
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जिला संवाददाता बंदना

शाहजहाँपुर ,में जिला गंगा समिति शाहजहाँपुर, डब्ल्यू0डब्ल्यू0एफ0 इण्डिया व वन विभाग शाहजहाँपुर के संयुक्त तत्वावधान में विगत कई वर्षों से समुदाय आधारित कछुआ संरक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, यह कार्यक्रम रामगंगा नदी की जलीय जैव विविधता के संरक्षण हेतु कछुओं को संरक्षित कर किया जाता है। कछुआ अपने अण्डों को नदी किनारे होने वाली पॉलेज की खेती में देते है, जोकि खेती के कारण अधिकांशतया नष्ट हो जाते है, कार्यक्रम अन्तर्गत किसानों के सहयोग से ऐसे कछुओं के अण्डों को हैचरी में संरक्षित किया जाता है।

जिसके क्रम में विकास खण्ड जलालाबाद में रामगंगा नदी तट स्थित गोरा घाट पर कछुआ विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि जिलाधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह एवं प्रभागीय वनाधिकारी सचिन कुमार ने बचाए गये कछुओं को उनके प्राकृतिक आवास रामगंगा नदी में छोड़कर किया। मुख्य अतिथि ने माँ स्वरूप पूजने वाली नदियों के संरक्षण हेतु कछुओं को पारिस्थितकीय तंत्र का महत्वपूर्ण अंग बताया तथा कछुओं के माध्यम से नदियों की स्वतः होने वाली साफ-सफाई पर चर्चा की व नदियों को भू-जल स्तर का प्रमुख स्रोत बताते हुये नदियों व जल को अमूल धरोहर बताया तथा जल की दुनियों को जानने व संरक्षित करने पर जोर दिया। प्रभागीय वनाधिकारी सचिन कुमार ने रामगंगा में पायी जाने वाली कछुओं की मुख्य प्रजातियां जैसे बगाटुर ढोंगोका व पंगशुरा टंेटोरिया के बारे में बताया तथा कार्यक्रम अन्तर्गत कुल 555 कछुओं के शावकों को पुनः उनके प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने की जानकारी दी जोकि विगत कई वर्षाें में संरक्षित किये गये कछुओं की संख्या से इस बार सर्वाधिक थी। जैव विविधता, नदी पारिस्थितकीय तंत्र के बारे में जानकारी देते हुये कछुओं को नदी के बेहतर स्वास्थ्य का प्रतीक बताया।

डब्ल्यू0डब्ल्यू0एफ0 इण्डिया के समन्वयक डॉ0 मोहम्मद आलम ने रामगंगा नदी के उद्गम स्थल से गंगा में मिलने तक अलग-अलग जिलों में किये गये संरक्षण कार्यों के बारे में जानकारी दी। जिसमें पर्यावरणीय प्रवाह, कृषि, जल प्रबन्धन, जैव विविधता संरक्षण तथा औद्योगिक इकाईयों के साथ किये गये जल संरक्षण के कार्यों को उल्लेखित किया। समन्वयक डॉ0 हरिमोहन मीना ने ग्रामीणवासियों की सहायता से अण्डों को संरक्षित करने से लेकर हैचिंग होने, कछुओं का स्वास्थ्य परीक्षण, वैज्ञानिक परीक्षण, बायोमैट्रिक इत्यादि के बारे में विस्तृत रूप से बताया। उप प्रभागीय वनाधिकारी डॉ0 सुशील कुमार ने सभी का आभार व्यक्त किया। विमोचन कार्यक्रम अन्तर्गत समस्त ग्रामवासियों ने आध्यात्मिक जुड़ाव के साथ विमोचन कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। संचालन जिला परियोजना अधिकारी, जिला गंगा समिति डा0 विनय कुमार सक्सेना ने किया। कार्यक्रम में विशेष सहयोग लीड जलीय जैव विविधता समन्वयक डॉ0 गौरा चन्द्र दास, रामऔतार, सीटू, आलोक मिश्रा, राकेश कुमार पाण्डेय, क्षेत्रीय वनाधिकारी विशाल रावत, वन दरोगा हरीलाल यादव, वन रक्षक अजीत सिंह, नवील अहमद व समस्त वन स्टॉफ, ग्रामीणजन आदि का रहा।

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