जंतर-मंतर पर निहत्थे Gen Z आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने का आदेश DCP राजा बांठिया ने दिया, SC ने दिए जांच के आदेश; गृहमंत्री की बढ़ीं मुश्किलें!
जंतर-मंतर पर CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर आंसूगैस/ पेलेट गन का इस्तेमाल करना, अब दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र बलों के लिए गले की हड्डी बन गया है। इस घटना को लेकर लगातार मांग की जा रही है कि ऐसा कदम उठाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। इसी बीच रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक डिप्टी कमांडेंट द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी ने दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ IPS अधिकारी की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। आलम यह है कि यह मामला न केवल राजनीतिक तूल पकड़ चुका है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए स्वतंत्र जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि जिम्मेदार अधिकारियों व पुलिसकर्मियों पर गाज गिरना तय है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 20 जुलाई (संसद मार्च वाले दिन) को B-108 RAF के डिप्टी कमांडेंट सतीश कुमार सांगवान ने संसद मार्ग पुलिस थाने में ड्यूटी ऑफिसर के समक्ष उपस्थित होकर एक महत्वपूर्ण बयान दर्ज कराया। उन्होंने जानकारी दी कि जंतर-मंतर स्थित जोन-1 में ‘CJP प्रोटेस्ट’ के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स द्वारा विशेष सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग किया गया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों पर जो भी कार्रवाई की गई, वह DCP नॉर्थ राजा बांठिया के सीधे निर्देशों पर हुई थी। भीड़ पर नियंत्रण पाने के लिए 55 नॉन-इलेक्ट्रिकल शेल, 15 इलेक्ट्रिकल शेल, 5 टियर स्मोक ग्रेनेड, 2 एआरजी (ARG) और 2 बीसी (BC) पीपी (PP) सुरक्षा सामग्रियों का उपयोग किया गया
पुलिस सूत्रों का कहना है कि 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया गया था। 19 जुलाई की देर रात से ही जंतर-मंतर पर भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी, जो सुबह होते-होते हजारों युवाओं के बड़े जमावड़े में बदल गई। जब भीड़ का एक हिस्सा संसद भवन की ओर बढ़ने लगा, तो उसे रोकने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले दागे। इसी दौरान भीड़ पर पेलेट गन का भी इस्तेमाल किया गया, जिसकी चपेट में आकर 3 लोग घायल हो गए। इनमें से एक युवक की आंख की रोशनी चले जाने का दावा किया गया है। जैसे ही यह तथ्य सार्वजनिक हुआ, यह तुरंत एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया कि आखिर निहत्थे युवा छात्रों पर पेलेट गन जैसी घातक तकनीक का इस्तेमाल क्यों किया गया?
मामला तूल पकड़ने पर दिल्ली पुलिस की ओर से सफाई दी गई कि उनके पास पेलेट गन नहीं होती है और यह कार्रवाई CRPF के किसी कर्मी द्वारा की गई होगी। हालांकि, जब CRPF ने आंतरिक जांच की, तो सामने आया कि रैपिड एक्शन फोर्स के एक जवान ने पेलेट गन चलाई थी।
अब जबकि जनरल डायरी में दर्ज जानकारी सामने आ चुकी है, तो यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या आईपीएस अधिकारी राजा बांठिया के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की जाएगी? यह सवाल इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि अगर कोई निचले स्तर का पुलिसकर्मी होता, तो उसे अब तक बलि का बकरा बना दिया गया होता। लेकिन चूंकि मामला एक IPS अधिकारी से जुड़ा है, तो देखना होगा कि निष्पक्ष कार्रवाई होती है या फिर लीपापोती कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। उधर, CJP ने केंद्र सरकार के साथ हुई वार्ता में साफ मांग रखी है कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पेलेट गन चलाने वाले सभी जिम्मेदार पुलिसकर्मियों व अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

