नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा है कि वास्तव में स्वतंत्र प्रेस वही हो सकता है, जो अपने पाठकों के सहारे चलता हो। सरकारी या कॉर्पोरेट आर्थिक संरचना पर निर्भर मीडिया संस्थान औपचारिक रूप से स्वतंत्र दिख सकते हैं, लेकिन आर्थिक दबाव और राजनीतिक संबंध उन्हें प्रभावित कर सकते हैं।उन्होंने कहा, “रीडर्स से चलने वाला प्रेस हमेशा सार्वजनिक हित की सेवा करने और राजनीतिक दबाव से बचने की बेहतर स्थिति में होता है।” उनके मुताबिक स्वतंत्र रिपोर्टिंग एक “पब्लिक गुड” है, जिसे सब्सक्रिप्शन मॉडल के जरिए समर्थन मिलना चाहिए। केवल सद्भावना के भरोसे अच्छी पत्रकारिता नहीं चल सकती; जब कोई पाठक सदस्यता लेता है तो वह वस्तुतः स्वतंत्र रिपोर्टिंग के पक्ष में खड़ा होता है।
आर्थिक दबाव:
प्रेस की आज़ादी के लिए बड़ा खतरा

