कानपुर में एक MBA छात्र ने मजबूरी में ऐसा फैसला लिया, जिसने उसकी जिंदगी बदल दी। परिवार की जिम्मेदारियों—बहन की पढ़ाई और शादी, अपनी फीस—के दबाव में वह टूट रहा था। इसी दौरान उसके एक जानने वाले ने उसे समझाया कि एक किडनी बेच देने से कुछ नहीं होता। बड़े-बड़े लोगों के उदाहरण देकर उसका डर खत्म किया गया और भरोसा दिलाया गया कि इससे उसकी गरीबी दूर हो जाएगी।
मजबूरी और भरोसे के बीच उसने अपनी किडनी बेच दी। लाखों रुपये मिलने का वादा किया गया था, लेकिन ऑपरेशन के बाद उसे पूरे पैसे भी नहीं मिले। जिस सौदे में 6-9 लाख रुपये मिलने थे, उसमें उसे सिर्फ करीब साढ़े तीन लाख रुपये ही दिए गए। जब उसे ठगे जाने का एहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
जांच में सामने आया कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक बड़ा किडनी रैकेट है, जिसमें कई शहरों और अस्पतालों का नेटवर्क शामिल है। गरीब और जरूरतमंद लोगों को झांसे में लेकर उनके अंग निकलवाए जा रहे थे और बदले में मोटी रकम कमाई जा रही थी। अब पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन यह मामला एक कड़वी सच्चाई भी सामने लाता है—मजबूरी में लिया गया गलत फैसला जिंदगी भर का बोझ बन सकता है।

