बहुत कम लोग जानते हैं जब मायवती पहली बार मुख्यमंत्री बनी तो पार्टी के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं ने एक सुरक्षित सलाह दी। कहा गया, “मैडम अफसरों से थोड़ा नरम रहिए वरना सिस्टम आपके खिलाफ हो जाएगा।” मायवती ने काफी देर तक कुछ नहीं कहा। अगली ही मीटिंग में उन्होंने सभी टॉप अफसरों से सिर्फ एक सवाल पूछा:
“क्या आप संविधान से उपर किसी को मानते हैं?”
कमरे में सन्नाटा छा गया। फिर उन्होंने कहा, “मैं किसी की दुश्मन नहीं हूँ लेकिन अगर डलित गरीब या पिछडे के हक में एक भी फाइल रोकी गई तो कुर्सी नहीं बचेगी।”
उस दिन के बाद कई अफसरों को समझ आ गया ये मुख्यमंत्री दबाव में चलने वाली नहीं है। दिलचस्प बात ये है कि मायवती ना डांटती थी, ना चिलाती थी, ना धमकी देती थी, बस नियम पढ़वाती थी। और अफसर कहते हैं जब मायावती जी संविधान की एक लाइन पढ़ देती थी तो पूरी मीटिंग खत्म। समझो ये ही वज़ह थी कि उनके विरोधी कहते थे वो कठोर है लेकिन उनके समर्थक कहते हैं वो नियमों से राज करती है।

