“यूपी के पूर्व डीजी आईपीएस दीपेश जुनेजा भ्रष्टाचार के मामले में घिरे हैं.. जांच शुरू हो गई है.. कार्रवाई की तलवार कभी भी चल सकती है..”
मुख्यमंत्री जी भी दीपेश जुनेजा से फूलों का गुलदस्ता लेते हुए खुश नहीं दिख रहे हैं..
दीपेश जुनेजा रिटायरमेंट से पहले अभियोजन विभाग के डीजी थे.. उन पर विभाग के 625 लैपटॉप की नीलामी में भ्रष्टाचार का आरोप है. वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव से उनकी शिकायत की गई.. वित्त विभाग से शिकायती पत्र गृह विभाग को भेजा गया.. इसके बाद अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद ने इस गंभीर मामले की जांच के आदेश दिए.. आंतरिक लेखा एवं परीक्षा विभाग के अपर निदेशक के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन करके जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट मांगी गई है..
शिकायतकर्ता का आरोप है कि लैपटॉप की नीलामी जेम पोर्टल से हुई थी.. नीलामी के दौरान जिस फर्म ने 19 लाख का प्रथम प्राइस दिया था, उसके बजाए मात्र 1.75 हजार रुपए वाली फर्म को काम दे दिया गया.. इस वजह से सरकार को करीब 17 लाख रुपए के राजस्व का चूना लगा.. शिकायतकर्ता का ये भी आरोप है कि नीलामी में शामिल लोगों ने फर्जीवाड़े को सही साबित करने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर की.. 19 लाख रुपए का प्राइस लगाने वाली कंपनी पर दबाव बनाया और नीलामी मूल्य में लैपटॉप न खरीद पाने की असमर्थता जताते हुए एक लेटर ले लिया.. इसके बाद अपनी पसंद की फर्म को नीलामी का काम देकर मोटी रकम वसूल ली..

