अल्लाह के करीब होने का महीना है रमजान इस महीने में मोमिन का रिजक बढ़ा दिया जाता है। इस महीने में बेसहारा गरीब मिस्कीन और यतीमो का खास ख्याल रखा जाए। कु राने करीम की
सूरत नंबर. 2 आयत नंबर. 185 मैं अल्लाह ताला फरमाता है।
रमज़ान का महीना वह है जिसमें क़ुरआन नाज़िल किया गया, जो सरापा हिदायत और ऐसी रोशन निशानियों का हामिल (यानी अपने अन्दर लिये हुए) है जो सही रास्ता दिखाती और हक़ व बातिल के दरिमयान दो-टूक फ़ैसला कर देती हैं, लिहाज़ा तुम में से जो शख़्स भी यह महीना पाये, वह इसमें ज़रूर रोज़ा रखे। और अगर तुम में से कोई शख़्स बीमार हो या सफ़र पर हो तो वह दूसरे दिनों में उतनी ही (रोज़ों की) तादाद पूरी कर ले (यानी बाद में रख ले)। अल्लाह तुम्हारे साथ आसानी का मामला करना चाहता है, और तुम्हारे लिये मुश्किल पैदा करना नहीं चाहता, ताकि (तुम रोज़ों की) गिनती पूरी कर लो, और अल्लाह ने तुम्हें जो राह दिखाई उस पर अल्लाह की तकबीर कहो (यानी उसकी बड़ाई बयान करो), और ताकि तुम शुक्रगुज़ार बनो।
रमजान का इस्तकबाल करते हुए शायर ने कहा है —
“ए माहे रमजान ए रब के मेहमान तेरा आना मुबारक हो,
रखेंगे रोजें पढ़ेंगे कुरान तेरा आना मुबारक हो
तेरी हर बात प्यारी है तेरी हर बात न्यारी हैं
तेरा हर दिन सुहाना है तेरी हर रात सुहानी है तुझी में आया है रब का कुरान तेरा आना मुबारक हो,
तू बख्शीस का ख़ज़ीना है तू रहमत का महीना है झड़ जाएंगे गुनाह बनेगी नोकिया तेरा आना मुबारक हो ए माहे रमजान ए रब के मेहमान तेरा आना मुबारक हो,
मुंतजिर है तेरे इमान वाले इमान वाले कुरान वाले तू सब का प्यारा है तू रब का प्यारा है तेरा आना मुबारक हो, ए माहे रमजान ए रब के मेहमान तेरा आना मुबारक हो।
पेशकश
डॉ इफ्तेखार अहमद कुरैशी कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष कुरेश कॉन्फ्रेंस रजिस्टर्ड उत्तर प्रदेश

