कानून की रक्षा करने वालों को जब कानून का पाठ पढ़ाया जाता है, तो अंजाम क्या होता है? इसकी एक बड़ी मिसाल हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में देखने को मिली।
क्या है पूरा मामला?
19 जनवरी 2026 को काकोरी थाने के दो दरोगा— उस्मान खान और लखन सिंह—अपने साथ सिपाही पुष्पेंद्र सिंह को लेकर हाई कोर्ट परिसर में दबिश देने पहुँच गए। उनका मकसद मुस्लिम अधिवक्ता गुफरान सिद्दीकी और अमीना को पकड़ना था। लेकिन बड़ी चूक यह हुई कि उन्होंने इसके लिए न तो कोई अनुमति ली और न ही कोर्ट की गरिमा का ख्याल रखा।
कोर्ट परिसर में ‘पुलिस बनाम पुलिस’
हाई कोर्ट की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने जब इन बाहरी जवानों को बिना इजाजत दबिश देते देखा, तो न केवल उन्हें रोका बल्कि जमकर फटकार भी लगाई। मामला सिर्फ डांट-फटकार तक नहीं थमा:
FIR दर्ज: हाई कोर्ट सुरक्षा की शिकायत पर तीनों के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज किया गया।
सस्पेंशन: विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों दरोगा और सिपाही को सस्पेंड कर दिया।
सीधे जेल: सबसे बड़ी कार्रवाई तब हुई जब कानून का उल्लंघन करने के आरोप में इन तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

