नई दिल्ली। हफ्तों की धरनेबाज़ी, लाठीचार्ज और आंसू गैस के बाद आखिरकार केंद्र सरकार को झुकना पड़ा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अचानक एक्स पर पोस्ट डालकर अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। ठीक उसी वक्त जब दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पर जमा प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए एक बार फिर आंसू गैस के गोले दाग रही थी। प्रधान ने लिखा कि वे नहीं चाहते कि छात्रों की मांग का फायदा “राष्ट्र-विरोधी ताकतें” उठाएं, और देश के युवाओं की भावनाओं व आकांक्षाओं का उन्हें पूरा सम्मान है। उनका इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ से इस आंदोलन के आगे पहली बड़ी रियायत है। जिस आंदोलन ने यह इस्तीफा करवाया, उसका नाम ही अजीब है “कॉकरोच जनता पार्टी”। कहानी मई महीने की एक अदालती टिप्पणी से शुरू होती है, जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक सुनवाई में कुछ बेरोज़गार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” यानी तिलचट्टों से कर दी थी। बात सोशल मीडिया पर आग की तरह फैली, और बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र अभिजीत डिपके ने व्यंग्य में इसी नाम से एक “पार्टी” बना डाली।
जो शुरुआत में महज़ एक ऑनलाइन मज़ाक लग रहा था, कुछ ही हफ्तों में तस्वीर बदल गई। मेडिकल और सरकारी नौकरियों की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक की खबरें सामने आईं, और 6 जून से छात्र सड़कों पर उतर आए। मांग एक ही थी, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा। इसके बाद हफ्तों तक जंतर-मंतर हज़ारों छात्रों के धरने का अड्डा बना रहा। कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तीन हफ्ते लंबी भूख हड़ताल आंदोलन का चेहरा बन गई। 20 जुलाई को जब भीड़ संसद की तरफ बढ़ी तो पुलिस ने रोकने के लिए लाठियां और आंसू गैस इस्तेमाल कीं, जिसमें दर्जनों लोग घायल हुए। पुलिस की सख्ती के वीडियो जैसे ही वायरल हुए, गुस्सा और भड़क गया और आंदोलन दिल्ली से निकलकर मुंबई समेत कई शहरों तक जा पहुंचा। इस बीच मांगें भी बढ़ती गईं। परीक्षा सुधार से लेकर बेरोज़गारी और सरकारी जवाबदेही तक।
प्रधान के इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर जश्न शुरू हो गया। लोग गले मिलते और तिरंगा लहराते दिखे। कॉकरोच जनता पार्टी ने एक्स पर सिर्फ इतना लिखा “डेमोक्रेसी विंस!” संस्थापक अभिजीत डिपके ने भीड़ के बीच कहा, “हमने कर दिखाया।”

