उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। कानपुर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कलेक्ट्रेट में तैनात तीन बाबुओं को उनकी खराब टाइपिंग स्पीड के चलते डिमोशन करके चपरासी बना दिया है।
एडीएम सिटी राजेश कुमार ने कहा कि कानपुर कलेक्ट्रेट 2023 में मृतक आश्रित कोटे के तहत प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव को जूनियर क्लर्क के पद पर नियुक्ति मिली थी। नियम के तहत नियुक्ति के एक साल के अंदर टाइपिंग टेस्ट पास करना होता है। इसमें एक मिनट में 25 शब्द टाइप करना अनिवार्य होता है। 2024 में तीनों कर्मचारियों को पहला टाइपिंग टेस्ट हुआ, लेकिन तीनों फेल हो गए। प्रशासन ने नरमी दिखाते हुए केवल वेतन वृद्धि रोक दी और मौका दिया। 2025 में दूसरी बार भी तीनों फेल हो गए।

