आज देश के संविधान निर्माता और दलितों व पिछड़े वर्ग के मसीहा कहे जाने वाले बाबासाहेब डॉ. भीम राव आंबेडकर की जंयती है। इस मौके पर उनके सबसे बड़े योगदान में से एक संविधान को लेकर भी कई बातें कहीं जाती हैं। उनमें से एक ‘संविधान जलाने की बात’ पर काफी चर्चा होती है।
बाबासाहेब आंबेडकर ने 1953 को राज्यसभा में संविधान संशोधन को लेकर चल रही बहस के दौरान संविधान जलाने वाली बात कही थी। उन्होंने कहा, ‘लोग हमेशा मुझसे कहते रहते हैं ओह, आप तो संविधान बनाने वाले हैं। मेरा जवाब है कि मैं एक हैक था। मुझसे जो करने को कहा गया, मैंने अपनी मर्जी के खिलाफ बहुत कुछ किया।’ उन्होंने गुस्से में कहा था, ‘मेरे मित्र कहते हैं कि मैंने संविधान बनाया है। लेकिन, मैं यह कहने के लिए पूरी तरह तैयार हूं कि संविधान को जलाने वाला मैं पहला व्यक्ति होऊंगा। मुझे इसकी जरूरत नहीं है। यह किसी के लिए अच्छा नहीं है।’

