तरुण की मौत का वैसा ही दुःख है, जैसे किसी भी लिंचिंग में हुई मौत का…यह हत्या वैसी ही है । हम सब हमेशा लिंचिंग के खिलाफ रहे हैं । किसी भी मासूम की हत्या पर हमारा रवैय्या एक ही रहा है । तरुण की क्या ग़लती थी,जो उसे पीट पीट कर मार डाला । जब लोग कानून को अपने हाथ में लेते हैं, तो हैवान बन जाते हैं ।
खबरों से पता चला कि तरुण की 11 साल की भतीजी से गलती से रंग का गुब्बारा एक दूसरी मुसलमान औरत पर गिर गया । वह औरत गुस्से में चिल्लाने लगी,जिसमें दोनों तरफ के काफी लोग इकट्ठे हो गए और झगड़ा बढ़ गया । तरुण तो वहां था ही नही,वह लौटकर आया,तो उसे कुछ लोगों ने घेरकर मारना शुरू किया,जिसमें उसकी मौत हो गई ।।लिंचिंग में मासूम ही मरते हैं, क्योंकि वह तो अनजान होते हैं कि सामने कोई क्या कर बैठेगा ।
अब उस औरत के कई करीबी जेल में हैं, कुछ फरार हैं ।।उनके घर का सामान सड़क पर है, गाड़ियां खाक़ हो चुकी हैं । पुलिस ने कम से कम इतना किया कि सख्ती करके कुछ गिरफ्तारी करी और झगड़े को इसके आगे बढ़ने से रोक लिया । अब लोगों को समझदारी दिखानी चाहिए,झगड़ा बढ़ने से सबका नुकसान है ।
वह औरत आज सोच रही होगी कि ज़रा से रंग पड़ने पर इतना भी क्या गुस्सा होना की किसी की जान चली जाए,खुद घर से बेघर हो जाएं । क्या हम किसी दूसरे को इतना भी बर्दाश्त नही कर सकते । इस सबके बीच तरुण जो अभी सिर्फ 26 साल का था,नही रहा । सब कुछ सामान्य हो जाएगा मगर तरुण तो चला गया न,क्या कोई गुस्सा इतना भी हो सकता है कि जान ले लें ।
हम बार बार रोज़ कहते हैं कि गुस्सा कम कीजिये । थोड़ा बर्दाश्त कीजिये ।।हिंसा और नफरत मत कीजिये । बदले को भूल जाइए । बच्चो की गलतियों को नज़रंदाज़ कीजिये । आख़िर नफरत का हासिल क्या ही है सिवाए बर्बादी के….
तरुण की लिंचिंग पर दिल दुःखी है ।।अफसोस यह है कि कितने तरुण,अंकित,जुनैद हम गवाकर समझेंगे की शांति और सद्भावना ही वह विकल्प है । जिससे कम से कम जान माल का नुकसान है । यह हिंदुओं और मुसलमानों,सिखों और बौद्धों, सबको समझना होगा । यह किसी एक के लिए नही है, सबको अपने अंदर सुधार लाना होगा । नफरत फैलाने वालों को नकारना होगा,वरना कितने ही तरुण और जुनैद बिना ग़लती के मरते रहेंगे ।
गुस्सा और ननफरत कम कीजिये और कोई विकल्प नही है । तरुण की मौत झकझोरने वाली है । मुझे यह अभी तक समझ नही आ रहा कि रंग लग भर जाने से ऐसा क्या भड़कना । यह भी नही देखना की सामने बच्चा है । सब कुछ कितना भयावह है । इसे रोक लीजिये,सबके रोके रुकेगा,वरना हैवानियत सबको हैवान बना बैठेगी ।
तरुण के हत्यारों को सख्त कानूनी सज़ा मिले । हत्यारों के लिए कोई हमदर्दी नही,हत्यारी भीड़ को कठोर कानूनी सज़ा मिले । तरुण के परिवार को इस दुख की घड़ी में सब्र मिले और अब यह नफरत और हत्याएं न हों….तरुण की तस्वीर देखकर दिल इस बात पर गमगीन है कि वह क्या कुछ करने का सपना देखता होगा और उसे यूँ मरना पड़ा । नफरत का ईलाज नफरत नही है, यह बात जितनी जल्दी समझ लें,उतना बेहतर…

