बसपा प्रमुख मायावती ने आरएसएस चीफ मोहन भागवत के उस बयान पर पलटवार किया है जिसमें उन्होंने आरक्षण का फायदा उठाने वालों से इसका लाभ छोड़ने की अपील की थी। मायावती का कहना है कि यह इनकी ऐसी जातिवादी सोच है जिससे संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति तो हो सकती है, पर इससे संवैधानिक उद्देश्यों की अवहेलना होती है। उन्होंने संघ से इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करने के लिए कहा है।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को अपने X हैंडल पर 4 पॉइंट में लंबा पोस्ट लिखा। उन्होंने लिखा है- देश में ’बहुजन समाज’ में से खासकर एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के लिये आरक्षण ’ सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ अर्थात् हमेशा से इनके आत्म-सम्मान की जिंदगी से जुड़ा अति-महत्वपूर्ण व अत्यन्त संवेदनशील मामला है। ति के आधार पर सदियों से यहां तोड़े, सताए और पछाड़े गए एससी व एसटी समाज के लिये तो यह अत्यंत जरूरी मामला भी विशेषकर तब बन जाता है जब जातिवादी द्वेष, शोषण, प्रताड़ना, अन्याय-अत्याचार कम होने का नाम ना ले।

