भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने कहा कि अगर न्यायालय केवल उन लोगों के अधिकारों की रक्षा करे जो मुकदमेबाजी का खर्च उठा सकते हैं, तो वह अपने संवैधानिक दायित्व को पूरी तरह नहीं निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का काम सिर्फ अधिकारों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि आम नागरिक वास्तव में न्याय तक पहुंच सके। न्याय तभी सार्थक है जब गरीब, कमजोर और वंचित वर्ग भी बिना किसी डर या आर्थिक बाधा के अदालत तक पहुंच सकें।
सीजेआई ने कहा कि जनता का विश्वास किसी भी न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होता है। यह विश्वास पारदर्शिता, निष्पक्षता और लगातार सुधार के प्रयासों से बनता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि संविधान में दिए गए अधिकार केवल किताबों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि हर नागरिक के जीवन में उनका वास्तविक प्रभाव दिखना चाहिए।
तकनीक की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधाओं से न्याय तक पहुंच आसान हुई है, लेकिन यह भी जरूरी है कि नई तकनीक अपनाते समय समानता और निष्पक्षता के सिद्धांतों से कोई समझौता न किया जाए।

